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सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी को लेकर ईडी के छापे, मुख्य आरोपित की जब्त की गईं कुछ अचल संपत्तियां

LHC0088 2026-1-21 05:56:30 views 1265
  

सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी को लेकर ईडी के छापे (फोटो- एक्स)



पीटीआई, कोच्चि। ईडी ने केरल के सबरीमाला मंदिर से सोने की कथित चोरी से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले की जांच के तहत तीन राज्यों में मंगलवार को छापे मारे। यह कार्रवाई ऐसे समय चल रही है, जब केरल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सोना चारी का यह मामला एक बड़ा मुद्दा बन रहा है। यह राज्य की विजयन सरकार के लिए सिरदर्द बन सकता है। राज्य में अप्रैल में विधानसभा होने की संभावना है।
केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में 21 स्थानों पर छापे

अधिकारियों के अनुसार, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु में 21 स्थानों पर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रविधानों के तहत छापेमारी की गई। ऐसा माना जा रहा है कि बेंगलुरु में मुख्य आरोपित उन्नीकृष्णन पोट्टी और त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) के पूर्व अध्यक्ष ए पद्मकुमार से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई। कुछ ज्वेलर्स के परिसरों पर भी छापे मारे गए।

उन्होंने बताया कि तलाशी के दौरान उन्नीकृष्णन की कुछ अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। ईडी ने हाल ही केरल पुलिस की प्राथमिकी का संज्ञान लेते हुए पीएमएलए के तहत एक मामला दर्ज किया है।यह मामला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील है।

केरल हाई कोर्ट की निगरानी में राज्य की विशेष जांच टीम (एसआइटी) द्वारा पहले से ही इस मामले की जांच की जा रही है। यह जांच कई अनियमितताओं से संबंधित है, जिसमें आधिकारिक कदाचार, प्रशासनिक चूक और भगवान अयप्पा मंदिर की विभिन्न कलाकृतियों से सोना चोरी करने की आपराधिक साजिश शामिल है।

ईडी अधिकारियों ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि सोने से मढ़ी कलाकृतियों को रिकार्ड में जानबूझकर तांबे की प्लेट के रूप में दर्शाया गया और इन्हें 2019 से 2025 के बीच मंदिर परिसर से अवैध रूप से हटाया गया। सोना कथित तौर पर चेन्नई और कर्नाटक में निजी स्थलों में रासायनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से निकाला गया।
भाजपा ने एसआइटी जांच पर उठाए सवाल

एएनआइ के अनुसार, भाजपा नेताओं ने तिरुअनंतपुरम में मंगलवार को सबरीमाला मंदिर से सोने की चोरी मामले को लेकर प्रदर्शन किया और पूर्व देवस्वओम मंत्री के सुरेंद्रन के घर तक विरोध मार्च निकाला।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वी मुरलीधरन ने दावा किया कि एसआइटी ने पूर्व मंत्री से पूछताछ के बारे में जानकारी नहीं दी, जबकि अन्य के मामले में विवरण सार्वजनिक किया गया। इससे जाहिर होता है कि कुछ छिपाया जा रहा है।
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