नई दिल्ली। हम अक्सर गाय और भैंस के दूध की बात करते रहते हैं, लेकिन गुजरात के कच्छ में \“ऊंटनी के दूध\“ ने किसानों की किस्मत बदल दी है। देश के पहले ऊंटनी के दूध प्रसंस्करण संयंत्र (Processing Plant) ने खरीद के मामले में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। ऊंटनी के दूध का प्रसंस्करण करने वाले पहले भारतीय संयंत्र ने पिछले वित्त वर्ष में रोजाना 4,754 लीटर दूध खरीदा। इस संयंत्र को कच्छ जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ ने स्थापित किया है जिसे \“सरहद डेयरी\“ के नाम से जाना जाता है। ऊंटनी के दूध में जरूरी खनिज भरपूर मात्रा में होते हैं, यह पूरे स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है और प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करता है।
गुजरात सरकार के अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि भुज की इस डेयरी ने वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 350 से ज्यादा ऊंट पालक परिवारों को कुल 8.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया, ‘‘वित्त वर्ष 2024-25 में ऊंटनी के दूध की दैनिक खरीद 4,754 लीटर तक पहुंच गई और 350 से ज्यादा परिवारों को कुल 8,72,83,440 रुपये का भुगतान किया गया।’’ सरहद डेयरी 900 से ज्यादा सहकारी समितियों के साथ मिलकर काम करती है और हर दिन लगभग 80,000 उत्पादकों से लगभग 5.5 लाख लीटर दूध (गाय और ऊंटनी का दूध शामिल) खरीदती है।
यह हर दिन चार लाख लीटर तक दूध का प्रसंस्करण करती है, 300 टन का पशुचारा संयंत्र चलाती है और रोज 50,000 लीटर आइसक्रीम बनाती है। विज्ञप्ति के मुताबिक, यह डेयरी हर दिन लगभग तीन करोड़ रुपये देकर पशुपालन करने वाले किसानों की मदद करती है। पिछले वित्त वर्ष में डेयरी ने 1,200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया, जो एक साल पहले की तुलना में 9.09 प्रतिशत अधिक है।
सरहद डेयरी (कच्छ जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ लिमिटेड) की यात्रा 2009 में शुरू हुई, लेकिन जनवरी 2013 में इसने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जब राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के तहत सरकार की मदद से लाखोंड, भुज-भच्छाऊ हाईवे पर 20,000 लीटर प्रतिदिन की प्रारंभिक क्षमता वाला मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट शुरू किया गया। सरहद डेयरी के पास ऊंटनी के दूध में मौजूद गंध को दूर करने वाला देश का पहला प्रसंस्करण संयंत्र है, जो जनवरी 2019 से ही काम कर रहा है। इस डेयरी की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी जब नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि डेयरी को ऊंटनी के दूध के लिए प्राइमरी जैविक प्रमाणीकरण भी मिल चुका है। अमूल मॉडल का अनुकरण करते हुए ऊंटनी का दूध कच्छ जिले के चार केंद्रों के जरिये इकट्ठा किया जाता है।
2020 में पनीर प्लांट की स्थापना हुई, जिसकी दैनिक क्षमता 2 टन है। इन विकासों ने सरहद डेयरी को कच्छ के ग्रामीण क्षेत्रों में दूध संग्रह और मूल्यवर्धन में मजबूत आधार प्रदान किया।शुरुआत में मात्र 15 सोसाइटीज, 1 चिलिंग सेंटर और महीने में 30,000 लीटर दूध (लगभग 10 लाख रुपये मूल्य) से शुरू हुई सरहद डेयरी ने अब 650 सोसाइटीज, 19 चिलिंग सेंटर्स और प्रतिमाह 5 लाख लीटर दूध (60 करोड़ रुपये मूल्य) तक का विस्तार कर लिया है।
यह अमूल ब्रांड के तहत दूध और दुग्ध उत्पादों का प्रसंस्करण करती है, जिससे हजारों पशुपालकों को नियमित आय मिल रही है। 2025 में सरहद डेयरी ने मध्य प्रदेश के अजयगढ़ और Hatta गांवों में दूध संग्रह शुरू किया, जो इसके भौगोलिक विस्तार और सहकारी मॉडल को नए क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रमाण है। यह सफेद क्रांति को कच्छ के सफेद रेगिस्तान से आगे ले जाने वाली एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी है।
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