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राज्य ब्यूरो, पटना। राज्य में जमीन मापी को लेकर लोगों की वर्षों पुरानी परेशानी अब खत्म होने वाली है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घोषणा की है कि 1 अप्रैल 2026 से अविवादित जमीन की मापी अधिकतम सात कार्य दिवस में और विवादित जमीन की मापी 11 कार्य दिवस के भीतर पूरी कर दी जाएगी। इसके लिए आवेदक द्वारा मापी शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल के जरिए यह जानकारी साझा की।
सात निश्चय-तीन के तहत बड़ा प्रशासनिक फैसला
मुख्यमंत्री ने लिखा कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार के गठन के कुछ ही दिनों बाद राज्य को देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाने के उद्देश्य से सात निश्चय-तीन (2025-30) कार्यक्रम को लागू किया गया।
इस कार्यक्रम का सातवां निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ है, जिसका मुख्य लक्ष्य आम नागरिकों के दैनिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करना है।
जमीन मापी में देरी बनी थी बड़ी समस्या
मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्सर यह देखने में आया है कि जमीन मापी के लिए आवेदन देने के बाद प्रक्रिया पूरी होने में काफी समय लग जाता है।
इस देरी के कारण लोगों को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ती है और कई मामलों में यही देरी भूमि विवाद का कारण बन जाती है। समय पर मापी नहीं होने से न्याय और प्रशासन दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
प्रक्रिया होगी सरल, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल
इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने भूमि मापी की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और नागरिक-अनुकूल बनाने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह फैसला ‘सबका सम्मान–जीवन आसान’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक अहम कदम है।
लंबित मामलों के लिए चलेगा विशेष अभियान
सरकार ने यह भी तय किया है कि 31 जनवरी 2026 तक जमीन मापी से जुड़े सभी लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया जाएगा। इसके लिए विशेष भूमि मापी अभियान चलाया जाएगा, ताकि वर्षों से अटके मामलों को समयबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सके।
रिपोर्ट अपलोड करना होगा अनिवार्य
नए प्रावधान के तहत अविवादित और विवादित दोनों प्रकार की जमीन की मापी तय कार्य दिवसों में पूरी करने के बाद अमीन द्वारा मापी का प्रतिवेदन अनिवार्य रूप से अपलोड किया जाएगा। यह प्रतिवेदन आवेदक की आवेदन तिथि के 14वें दिन निर्धारित पोर्टल पर उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
कर्मचारियों और संसाधनों की होगी पूरी व्यवस्था
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि तय समय सीमा में जमीन मापी सुनिश्चित करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग आवश्यक कर्मचारियों और संसाधनों की व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया की गहन निगरानी और पर्यवेक्षण भी किया जाएगा, ताकि किसी स्तर पर लापरवाही न हो।
भूमि विवादों पर लगेगी लगाम
सरकार का मानना है कि समयबद्ध जमीन मापी से न केवल आम लोगों को राहत मिलेगी, बल्कि भूमि विवादों में भी भारी कमी आएगी। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और नागरिकों का सरकार पर भरोसा और मजबूत होगा। |
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