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DIG किशोर कौशल। फोटो जागरण
जागरण संवाददाता, पलामू। भारतीय पुलिस सेवा के 2012 बैच के अधिकारी किशोर कौशल ने हाल ही में पलामू प्रक्षेत्र के 34वें पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर योगदान दिया है। सेवा में आने के बाद उन्होंने अपना प्रशिक्षु काल चतरा जिले में पूरा किया।
इस दौरान वे सिमरिया थाना में थाना प्रभारी के रूप में कार्यरत रहे। इसके बाद उन्होंने पाकुड़ में अपर पुलिस अधीक्षक (एएसपी), रांची में सिटी एसपी, रामगढ़ के एसपी, दुमका के एसपी, धनबाद के एसएसपी, रांची के एसएसपी तथा जमशेदपुर के एसएसपी के रूप में अपनी सेवाएं दीं।
पलामू प्रक्षेत्र के डीआईजी के पद पर पदस्थापन से पूर्व वे झारखंड सशस्त्र पुलिस (जैप)-7 के कमांडेंट के रूप में कार्यरत थे। पलामू में योगदान देने के बाद दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ सच्चिदानंद ने उनसे विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश:-
प्रश्न : पलामू प्रमंडल में उग्रवाद की वर्तमान स्थिति को आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर : पलामू प्रमंडल में उग्रवाद की जड़ें काफी हद तक काट दी गई हैं। गढ़वा जिले में उग्रवादी गतिविधियां लगभग नियंत्रण में हैं। हालांकि, पलामू और लातेहार जिले के कुछ इलाकों में अब भी छिटपुट रूप से नक्सली सक्रियता देखने को मिलती है। इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस दिशा में संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के साथ समन्वय स्थापित कर ठोस रणनीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न : पलामू प्रमंडल में संगठित अपराध की स्थिति को आप किस तरह देखते हैं?
उत्तर : पलामू प्रमंडल के पलामू और लातेहार जिलों के कुछ आर्थिक क्षेत्रों में संगठित अपराध गिरोह सक्रिय हैं। विशेष रूप से राहुल दूबे और राहुल सिंह गिरोह समय-समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं, जो पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। इन गिरोहों द्वारा छिटपुट आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया गया है तथा रंगदारी को लेकर व्यवसायियों को धमकी भरे फोन किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
हालांकि, इनके गिरोह से जुड़े कई सदस्यों की गिरफ्तारी भी की गई है। संगठित अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सिस्टमैटिक तरीके से कार्रवाई की जाएगी और इस दिशा में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
प्रश्न : पलामू प्रमंडल में अपराध के प्रमुख कारण क्या हैं और पुलिस इसे लेकर क्या रणनीति अपनाएगी?
उत्तर : पलामू प्रमंडल में अपराध का एक बड़ा कारण जमीन विवाद है। भूमि विवाद को लेकर आपसी झगड़े होते रहते हैं, जो कई बार आपराधिक घटनाओं का रूप ले लेते हैं। इसे देखते हुए सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जमीन विवाद में अनावश्यक रूप से हस्तक्षेप न करें।
हालांकि, यदि भूमि विवाद के कारण विधि-व्यवस्था प्रभावित होने की स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस तत्काल कार्रवाई करेगी। साथ ही, संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) के साथ समन्वय स्थापित कर बैठकें की जाएंगी और जमीन विवाद के समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाएगी।
प्रश्न : महिलाओं के विरुद्ध अपराध, डायन-बिसाही तथा अफीम पोस्ता की खेती को लेकर पुलिस की क्या रणनीति रहेगी?
उत्तर : महिलाओं के विरुद्ध अपराध और लैंगिक अपराधों के मामलों में पुलिस पूरी संजीदगी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करेगी। सभी थाना प्रभारियों को महिलाओं से जुड़े अपराधों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही डायन-बिसाही से जुड़े मामलों में भी तत्काल और कठोर कार्रवाई करने को कहा गया है।
जहां तक पलामू प्रमंडल में अफीम पोस्ता की खेती का प्रश्न है, तो बीते वर्ष पलामू और लातेहार जिलों के सीमावर्ती इलाकों में इसको लेकर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी। इस वर्ष भी यह अभियान लगातार जारी है।
हालांकि, सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अधिकांश खेती वन भूमि में की जाती है, जिससे आरोपितों की पहचान करना और न्यायालय में साक्ष्य के साथ आरोप सिद्ध करना कठिन हो जाता है। यदि यह खेती रैयती भूमि में होती, तो संबंधित रैयत के खिलाफ सीधे कार्रवाई संभव होती।
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