search

आसान नहीं होगी नितिन नवीन की राह, भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने कई चुनौतियां; दक्षिण भारत पर होगा फोकस

cy520520 2026-1-20 06:56:59 views 1118
  

क्षिण भारत के किले को पूरी तरह से फतह करने का काम अभी बाकी है (फाइल फोटो)



नीलू रंजन, नई दिल्ली। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के सामने भाजपा की पिछले एक दशक की विस्तार की रफ्तार को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी। इनमें अभी तक अभेद्य रहे दक्षिण भारत के किले को फतह करने के साथ ही मौजूदा भाजपा शासित राज्यों में पार्टी की जीत को बरकरार रखना शामिल है। इसके साथ ही कर्नाटक जैसे राज्यों में स्थानीय नेताओं के बीच मतभेदों को दूर कर पार्टी के भीतर समन्वय और सहयोग को सुनिश्चित करना होगा।

  

सबसे कम उम्र में भाजपा अध्यक्ष बनने वाले नवीन को युवा नेताओं के जोश और वरिष्ठ नेताओं के अनुभवों के बीच तालमेल बिठाना होगा। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद भाजपा का विस्तार देश के कोने-कोने में हो गया है। 14 करोड़ सदस्यों के साथ दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी भी बनी हुई है। लगभग दो दर्जन राज्यों में भाजपा अकेले या फिर सहयोगियों के साथ सत्ता में है। लेकिन दक्षिण भारत के किले को पूरी तरह से फतह करने का काम अभी बाकी है।
केरल में अभी तक पैठ बनाने में विफल

कर्नाटक में भाजपा अपनी सरकार बना चुकी है और आंध्रप्रदेश में टीडीपी के साथ सरकार में है। लेकिन तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में अभी तक पैठ बनाने में विफल रही है। लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में लोकसभा चुनाव में 17 में से आठ सीटें जीतकर भाजपा ने अपनी ताकत जरूर दिखाई है, लेकिन राज्य में सत्ता में आने का सपना पूरा होना बाकी है। वहीं केरल में पहली बार एक सांसद और राजधानी तिरूवनंतपुरम में मेयर बनाने में सफल रही भाजपा को काफी कुछ हासिल करना बाकी है।

  

तमिलनाडु में 2024 के लोकसभा चुनाव में अकेले दम पर खड़ा होने की कोशिश परवान नहीं चढ़ सकी और विधानसभा चुनाव में एआइएडीएमके के सहयोग से राजग की सरकार बनाने की कोशिश में है। इन राज्यों में नितिन नवीन के संगनात्मक क्षमता की असली परीक्षा होगी। भाजपा शासित राज्यों में पार्टी सत्ता विरोधी लहर की जगह सरकार के पक्ष में बार-बार जन समर्थन जुटाने में सफल रही है। गुजरात जैसे राज्य में तीन दशक से सत्ता में है।

वहीं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, त्रिपुरा जैसे राज्यों में तीसरी बार सरकार बनाने के लिए मैदान में उतरेगी। इन राज्यों में सरकार और संगठन के बीच समन्वय के साथ जन समर्थन को बनाए रखना भी चुनौती होगी। इसमें बिहार में 20 साल बाद भी राजग की जीत के पीछे की मेहनत और अनुभव नितिन नवीन के काम आ सकती है।

यह भी पढ़ें- निर्विरोध चुने गए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, CM नायब सहित हरियाणा से 20 पदाधिकारी बने प्रस्तावक
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
164423