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ईरान संकट ने बढ़ाई दिल्ली के थोक बाजारों की चिंता, 4,000 करोड़ रुपये के कारोबार प्रभावित

cy520520 2026-1-20 04:56:17 views 649
  

ईरान संकट का सीधा असर भारत पर पड़ता नजर आ रहा।



नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। ईरान में गृह युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। सरकार के विरूद्ध विरोध प्रदर्शनों में कमी जरूर आई है, लेकिन हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जिसके चलते इंटरनेट और फोन सेवा अभी भी ठप है। उसके चलते खारी बावली के ईरान से पिस्ता, आलू बुखारा व मामरा जैसे सूखे मेवे आयात करने वाले थोक कारोबारी धीरज सिंधवानी चिंतित हैं।

वह कहते हैं कि एक वर्ष से अधिक समय से ईरान में आंदोलन के चलते सूखे मेवे की आपूर्ति प्रभावित है। समय पर उत्पाद न आने से आर्डर को पूरा करने में दिक्कत आ रही है। वह लोग ईरान में संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन नहीं हो पा रहा है।

दिल्ली में ईरानी खजूर के साथ पिस्ता काफी लोकप्रिय है। पिस्ता की पूर्ति ईरान के प्रतिद्वंद्वी अमेरिका से पूरी की जा रही है, लेकिन इसके चलते उसका दाम करीब दोगुना हो चुका है। वर्ष 2024 तक खारी बावली में पिस्ता जहां 800 से 1,100 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध था। अब वह 1,400 से 1,800 रुपये तक पहुंच गया है।
शेरवानी के साथ अन्य परिधान काफी लोकप्रिय

वहीं, ईरान में चांदनी चौक का लहंगा, शेरवानी के साथ अन्य परिधान काफी लोकप्रिय है, जिसका भी निर्यात बाधित है।
दिल्ली हिंदुस्तानी मर्केंटाइल एसोसिएशन के महामंत्री श्रीभगवान बंसल के अनुसार, कई निर्यातकों का बकाया भी फंसा हुआ है, जो चिंता की बात है। साथ ही तैयार माल के निर्यात में वहां अस्थिरता के चलते अनिश्चितता बनी हुई है।

चैंबर आफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) के अनुसार, दिल्ली के प्रमुख थोक बाजारों के ईरान से कारोबार रिश्तें काफी पुराने और प्रगाढ़ संबंध रहे हैं। सीटीआइ के चेयरमैन बृजेश गोयल कहते हैं कि अगर ईरान में संकट लंबे समय तक बरकरार रहा तो दिल्ली का करीब 4,000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित होगा। उनके अनुसार, फिलहाल दोनों में कारोबारी गतिविधियां न्यूनतम स्तर पर है।
ऑटो पार्ट़्स का निर्यात भी ईरान को

चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस से दवा व चिकित्सकीय उपकरणों तथा कश्मीरी गेट मार्केट से आटो पार्ट़्स का निर्यात भी ईरान को होता है। जबकि, दरीबा व कूचा महाजनी जैसे गहनों के बाजार में ईरान से हकीक व फिरोजा समेत अन्य कीमती पत्थर आते हैं। इसी तरह, तिलक बाजार में रसायन भी वहां से आता है। बृजेश गोयल के अनुसार, पुरानी दिल्ली के बाजारों से ईरान को प्रति वर्ष करीब 3,000 करोड़ रुपये तो आयात तो 4,500 करोड़ रुपये का निर्यात होता है।

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