फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। दक्षिण पूर्व रेलवे (SER), एसईसी (SEC) और ईको (ECo) रेलवे एम्प्लाइज को-आपरेटिव क्रेडिट सोसायटी लिमिटेड, कोलकाता में हुए करोड़ों रुपये के कथित भ्रष्टाचार की गूंज अब देश की राजधानी तक पहुंच गई है। सोसायटी के वर्तमान चेयरपर्सन एसपी सिंह ने सोमवार को नई दिल्ली में सहकारिता मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर पूर्व निदेशक मंडल के कारनामों का कच्चा-चिट्ठा पेश किया।
चेयरपर्सन एसपी सिंह ने सहकारिता चुनाव प्राधिकरण के डीके सिंह, केंद्रीय रजिस्ट्रार (को-आपरेटिव सोसायटी) आलोक कुमार झा और संयुक्त रजिस्ट्रार मोनिका खन्ना के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस दौरान उन्होंने ज्ञापन सौंपते हुए पूर्व बोर्ड द्वारा की गई वित्तीय अनियमितताओं के साक्ष्य साझा किए।
मृतकों के नाम पर निकासी और अवैध नियुक्तियां सौंपे गए ज्ञापन में सबसे चौंकाने वाला खुलासा मृत रेलकर्मियों से जुड़ा है। आरोप है कि पूर्व निदेशकों ने कागजों पर मृत कर्मचारियों को \“जीवित\“ दिखाया और उनके नाम पर सोसायटी के फंड से लाखों रुपये निकाल लिए।
इसके अलावा, भ्रष्टाचार का जाल नियुक्तियों तक भी फैला था। सेंट्रल रजिस्ट्रार और माननीय हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश थे कि बिना समय पर चुनाव कराए कोई भी नीतिगत निर्णय या नई नियुक्ति नहीं की जाएगी। इसके बावजूद, नियमों को ताक पर रखकर पूर्व बोर्ड ने अपने रिश्तेदारों और चहेतों को फर्जी तरीके से नौकरियां बांटीं। यह सब उस पैसे के साथ किया गया, जो हजारों रेल कर्मचारियों ने अपनी मेहनत की कमाई से शेयर के रूप में जमा किया था।
दोषियों के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई सहकारिता मंत्रालय ने इन आरोपों को अत्यंत गंभीरता से लिया है। सेंट्रल रजिस्ट्रार ने आश्वासन दिया है कि शेयरधारकों के पैसे के दुरुपयोग और अवैध नियुक्तियों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मंत्रालय के कड़े रुख से रेलवे कर्मचारियों के बीच न्याय की उम्मीद जगी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच की आंच किन-किन सफेदपोशों तक पहुँचती है। |
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