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बांग्लादेश में अशांति के बीच धान की किल्लत, भारत से मांगा 2 लाख टन भुजिया चावल

LHC0088 2026-1-19 21:26:59 views 1147
  

बांग्लादेश ने निजी क्षेत्र को 2 लाख टन उसना चावल आयात की अनुमति दी।



राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बांग्लादेश सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को दो लाख मीट्रिक टन उसना (बायल्ड) चावल आयात की अनुमति देने से भारतीय चावल मिलरों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खुल गए हैं।

भारतीय उद्योग जगत ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे खासकर पूर्वी और दक्षिणी भारत के चावल आपूर्तिकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा।
2 लाख टन उसना चावल आयात की अनुमति

यह अनुमति 232 निजी कंपनियों को दी गई है, जिन्हें 10 मार्च 2026 तक चावल आयात करना होगा। बांग्लादेश में चावल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी, विशेषकर फाइन और स्टीम चावल की किस्मों में उछाल, इस निर्णय का प्रमुख कारण मानी जा रही है।

यह आयात कोटा अगस्त 2025 में घोषित बांग्लादेश की उस योजना का अतिरिक्त हिस्सा है, जिसके तहत वित्त वर्ष 2025-26 में कुल नौ लाख मीट्रिक टन चावल आयात कर घरेलू भंडार मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया था। बाढ़ से फसल को हुए नुकसान के बाद यह कदम उठाया गया था।
भारतीय चावल मिलरों और निर्यातकों को मिलेगा सीधा लाभ

इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने कहा कि बांग्लादेश लंबे समय से भारतीय चावल का भरोसेमंद खरीदार रहा है और आंध्र प्रदेश तथा बंगाल के व्यापारी इससे सबसे अधिक लाभांवित होते हैं। भौगोलिक निकटता और प्रतिस्पर्धी कीमतें भारतीय चावल को स्वाभाविक बढ़त देती हैं।

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, बांग्लादेश के खाद्य मंत्रालय की अधिसूचना में गैर-सुगंधित पारबायल्ड चावल के आयात की अनुमति दी गई है, जिसमें टूटे दानों की सीमा अधिकतम पांच प्रतिशत रखी गई है।
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण हेतु बांग्लादेश का महत्वपूर्ण कदम।

जमाखोरी रोकने के लिए आयातकों को चावल मूल बोरियों में बेचने और बिक्री व भंडारण का विवरण जिला खाद्य नियंत्रकों को देने का निर्देश दिया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत द्वारा मार्च 2025 में सभी निर्यात प्रतिबंध हटाने के बाद चावल निर्यात में तेज वृद्धि हुई है।

2025 में भारत का कुल चावल निर्यात 19.4 प्रतिशत बढ़कर 2.15 करोड़ मीट्रिक टन पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय चावल की कीमत पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम होने से भी बांग्लादेश के लिए भारत सबसे किफायती और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।
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