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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष निमंत्रण पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान आज यानी 19 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर दिल्ली पहुंचे। पीएम मोदी ने उनका पालम एयरपोर्ट पर गर्मजोशी से स्वागत किया। । यह मुलाकात इसलिए खास मानी जा रही है, क्योंकि उनका पूरा भारत दौरा बहुत छोटा है। कुल मिलाकर वे भारत में सिर्फ करीब 1 घंटा 45 मिनट ही रुके ।
बता दें कि शेख मोहम्मद बिन जायद की यह कोई ट्रांजिट विज़िट नहीं है। शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान खास तौर पर प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए ही UAE से भारत आए। अगर दूरी की बात करें, तो अबू धाबी से नई दिल्ली की उड़ान में तीन घंटे से ज्यादा का समय लगता है। यानी वे करीब डेढ़ घंटे की बैठक के लिए छह घंटे से ज्यादा की यात्रा की। भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने रविवार को बताया कि शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण पर आधिकारिक दौरे पर भारत आए हैं।
करीब दो घंटे का रहा दौरा
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शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को शाम 4:20 बजे नई दिल्ली के एयर फोर्स स्टेशन पालम पहुंचे। इसके बाद शाम 4:45 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोक कल्याण मार्ग स्थित आधिकारिक आवास पर दोनों नेताओं के बीच बैठक शुरू हुई। यह बैठक करीब डेढ़ घंटे चलेगी और UAE के राष्ट्रपति शाम 6:05 बजे भारत से रवाना हो गए। नई दिल्ली में उतरने से लेकर अबू धाबी के लिए उड़ान भरने तक, शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान कुल 1 घंटा 45 मिनट भारत में रहे।
दोनों देशों में बढ़ेगी रक्षा साझेदारी
UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UAE के राष्ट्रपति के बीच बातचीत में गर्मजोशी और गहरी दोस्ती साफ दिखाई दी। उन्होंने कहा कि यही भरोसा और नज़दीकी भारत-UAE रिश्तों की पहचान बन चुकी है। विक्रम मिसरी ने बताया कि भारत और UAE के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को मजबूत करने के लिए एक फ्रेमवर्क समझौते की दिशा में काम करने पर सहमति बनी है। इसके लिए दोनों देशों ने एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं।
हुए ये भी समझौते
इसके अलावा, अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला हुआ है। भारत के इंडियन नेशनल स्पेस प्रमोशन एंड ऑथराइजेशन सेंटर और UAE स्पेस एजेंसी के बीच अंतरिक्ष इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए एक संयुक्त पहल पर लेटर ऑफ इंटेंट साइन किया गया है। इस पहल के तहत नए लॉन्च कॉम्प्लेक्स, सैटेलाइट बनाने की सुविधाएं, साझा अंतरिक्ष मिशन, स्पेस अकादमी और ट्रेनिंग सेंटर शुरू करने पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही, गुजरात के धोलेरा में स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में UAE की भागीदारी को लेकर भी एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह एक बड़ी साझेदारी होगी, जिसमें अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, विमान मरम्मत (MRO) सुविधा, नया बंदरगाह, स्मार्ट शहर, रेलवे कनेक्टिविटी और ऊर्जा से जुड़ी कई परियोजनाएं शामिल होंगी। कुल मिलाकर, इस यात्रा में भारत और UAE के बीच रक्षा, अंतरिक्ष और निवेश जैसे अहम क्षेत्रों में सहयोग को और आगे बढ़ाने पर ठोस सहमति बनी है।
पीएम मोदी खुद पहुंचे एयरपोर्ट
सोमवार दोपहर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को रिसीव करने के लिए एयर फोर्स स्टेशन पालम पहुंचे। इसके बाद दोनों नेताओं की कार में साथ बैठे हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई, जिसमें उनकी आपसी दोस्ती साफ नजर आई। यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है, जब मिडिल ईस्ट में हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे माहौल में भारत, संयुक्त अरब अमीरात का एक भरोसेमंद और करीबी साझेदार माना जाता है।
इस समय ईरान एक नए संकट का केंद्र बन गया है। वहां हाल ही में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हालात बिगड़े हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के शासन को चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया, तो जवाबी हमले किए जाएंगे। तेहरान के आंकड़ों के अनुसार, इन अशांत घटनाओं में अब तक कम से कम 5,000 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा इज़राइल और गाजा से जुड़ा तनाव भी बना हुआ है। हालांकि ट्रंप ने इजरायल-हमास युद्ध में कुछ समय के लिए रोक लगवाई है, लेकिन अमेरिका एक स्थायी और लंबे समय तक चलने वाले समाधान की कोशिश कर रहा है।
अहम है ये मुलाकात
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात खुद भी युद्ध से जूझ रहे यमन में उलझा हुआ है, जहां सऊदी अरब के साथ भी एक संघर्ष में है। दिसंबर 2025 के आखिर में सऊदी अरब ने UAE को कड़ी चेतावनी दी थी और यमन के मुकल्ला बंदरगाह पर हवाई हमले किए थे। इस बंदरगाह पर ऐसे एक गुट का कब्जा बताया गया था, जिसके अबू धाबी से संबंध माने जा रहे थे। इसके बाद UAE ने पीछे हटते हुए कहा कि वह यमन से अपने सैनिकों को वापस बुला लेगा। मध्य पूर्व में चल रहे इन सभी संकटों की वजह से उस छोटी लेकिन अहम बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस दौरान ऐसे रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा हुई, जिन पर फोन या वीडियो कॉल के जरिए बात करना मुमकिन नहीं था। |
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