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फ्लिपकार्ट और एक्सिस बैंक लौटाएंगे रुपये, आयोग ने दिया आदेश, ऑनलाइन खरीद के नाम पर बिना परमिशन कटे थे ग्राहक के पैसे

LHC0088 2026-1-16 05:56:37 views 1067
  



निरंकार जायसवाल, बाराबंकी। आनलाइन शापिंग के दौरान उपभोक्ता के खाते से बिना अनुमति हुए लेन-देन के एक मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने फ्लिपकार्ट और एक्सिस बैंक की लापरवाही को गंभीर माना है। आयोग ने दोनों कंपनियों को उपभोक्ता को उसकी धनराशि सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करने का आदेश दिया है।

मामला फ्लिपकार्ट और एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड से जुड़ा है। टिकैतनगर के मुख्य बाजार निवासी अजय कुमार फ्लिपकार्ट के सदस्य है उनके एक्सिस बैंक के क्रेडिट कार्ड का फ्लिपकार्ड कंपनी में अनुबंध है। उनका क्रेडिट सिविल स्कोर अच्छी श्रेणी में है। 31 मई की शाम अज्ञात व्यक्ति ने उनके फ्लिपकार्ट खाते में लागिन करके सात आर्डर किए गए।

इसकी जानकारी होने पर अजय ने फ्लिपकार्ट को फोन काल व ई-मेल से संपर्क कर आर्डर कैंसल करने को कहा, यही नहीं आर्डर कैंसल करने का कोई विकल्प भी नहीं मिला। जब आर्डर कैंसल नहीं किया गया तो उसने एहतियात के तौर पर एक्सिस बैंक को सूचना दी कि इस आर्डर का भुगतान न किया जाए। यहां भी अजय की सुनवाई नहीं हुई और कार्ड से भुगतान कट गया।

मेल पर हुई पुष्टि

यही नहीं, उसी दिन रात करीब सवा आठ बजे मेल पर पुष्टि की गई कि आर्डर डिलीवर हो गए है। जबकि डिलीवरी प्राप्त करने के लिए ई-मेल पर आने वाला कोड बताना था। अजय को कोई भी कोड युक्त प्रोडक्ट मेल नहीं मिला।

करीब दस बजे फिर से फ्लिपकार्ट को काल किया और कहा कि जैसा कि ईमेल सूचना में कहा गया है कि उत्पाद डिलीवर हो गया, लेकिन मुझे कोई उत्पाद प्राप्त नहीं हुआ है और जल्द ही इन आर्डर्स को बंद करने की सलाह दी। वहीं भुगतान लेनदेन या उत्पाद विवरण के बारे में कोई भी ईमेल प्राप्त नहीं हुआ। केवल चार ओटीपी उनके मोबाइल पर इन सात लेनदेन के लिए आए थे।

आयोग ने फ्लिपकार्ट को मानसिक उत्पीड़न, पीड़ा और समय बर्बाद करने के लिए 10 हजार रुपये और एक्सिस बैंक को बैंक खाते की सुरक्षा में चूक के लिए 10 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। इसके अलावा 2,000 रुपये वाद व्यय भी अदा करने होंगे।

आयोग के अध्यक्ष अमरजीत वर्मा तथा सदस्य डा. एसके त्रिपाठी और मीना सिंह की पीठ ने पारित किया है, कि इसके अनुपालन के लिए 45 दिन की समय-सीमा तय की है। तय अवधि में भुगतान न होने पर पूरी राशि पर 10 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा।
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