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पीएम किसान की 22वीं किस्त पर संकट, नामांतरण नहीं कराने वाले किसान लाभ से हो सकते वंचित

deltin33 2026-1-14 14:27:12 views 1254
  

Bihar farmer scheme issue: जमीन का नामांतरण अब भी दादा-परदादा या पूर्वजों के नाम होने से परेशानी। सौ: इंटरनेट मीडिया  



संवाद सहयोगी, मनियारी (मुजफ्फरपुर)। PM Kisan 22nd installment: पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर पूरे राज्य में इन दिनों फार्मर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है। इसने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। विशेषकर वैसे किसान जिनका बंटवारानामा या नामांतरण का पेच फंसा है।  

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में शुरू की गई थी, लेकिन 22वीं किस्त को लेकर ग्रामीण इलाकों में चिंता और असंतोष बढ़ता जा रहा है। जिले के कई गांवों में ऐसे किसान हैं जो वर्षों से खेती कर रहे हैं, लेकिन जमीन का नामांतरण अब भी दादा-परदादा या पूर्वजों के नाम दर्ज होने के कारण योजना का लाभ मिलने पर संशय बना हुआ है।  
दशकों से नामांतरण नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि योजना के तहत लाभ उसी व्यक्ति को मिलता है, जिसके नाम पर जमीन का राजस्व रिकॉर्ड दर्ज है। जबकि हकीकत यह है कि जिले के अधिकांश गांवों में दशकों से जमीन का नामांतरण नहीं हुआ है। बंटवारा नहीं होने, कागजी जटिलताओं और खर्च के डर से किसान आज भी पुराने रिकॉर्ड पर ही खेती कर रहे हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि वास्तविक किसान सरकारी सहायता से बाहर हो जाएंगे।  
रिकार्ड अपडेट नहीं होने से परेशानी

किसानों का आरोप है कि सरकार ने योजना बनाते समय जमीनी सच्चाई को नजरअंदाज किया है। जिनके हाथ में हल है और जो खेत जोत रहे हैं, वही किसान सम्मान निधि से वंचित हो रहे हैं। कई मामलों में जमीन मालिक का निधन हो चुका है और उनके वारिस खेती कर रहे हैं, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं होने के कारण सम्मान निधि की राशि अटक सकती है।
प्रक्रिया में उलझे किसान

ग्रामीण क्षेत्रों में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब 2029–2030 तक चुनाव होने हैं, तब तक यदि व्यवस्था नहीं सुधरी तो ऐसे किसान कब तक इंतजार करेंगे। छोटे और सीमांत किसानों के लिए सालाना छह हजार रुपये की सहायता भी बड़ी राहत होती है, लेकिन कागजी नियमों और प्रक्रियाओं में उलझकर वही किसान सबसे अधिक नुकसान झेल रहे हैं।  
सुधार कराने की प्रक्रिया कठिन

लोगों का आरोप है कि इस स्थिति के लिए केंद्र और राज्य सरकारें दोनों जिम्मेदार हैं। केंद्र सरकार ने योजना तैयार करते समय ग्रामीण भूमि व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह नहीं समझा, वहीं राज्य सरकारें अब तक जमीन रिकॉर्ड सुधार और नामांतरण प्रक्रिया को सरल नहीं बना सकीं। राजस्व और कृषि विभाग भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था देने में विफल साबित हुए हैं।  
पंचायत स्तर पर सत्यापन हो

ग्रामीणों की मांग है कि सरकार जमीन के नाम के बजाय खेती करने वाले वास्तविक किसान को योजना का लाभ दे। पंचायत स्तर पर सत्यापन, संयुक्त व पैतृक जमीन पर खेती करने वालों को शामिल करने और नामांतरण प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत है। जब तक ऐसा नहीं किया जाता, तब तक किसान सम्मान निधि योजना कागजों तक सीमित रह जाएगी और असली किसान सम्मान से वंचित होते रहेंगे।

देर से ही सही, लेकिन अब राज्य के विभिन्न भागों से इस तरह की परेशान की आवाज उठने लगी है। किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से कोई भी प्रक्रिया लोगों की सुविधा के लिए बनाई जानी चाहिए। यदि इसमें सुधार नहीं किया गया तो बहुत से किसान लाभ से वंचित हो जाएंगे।
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