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मंदार महोत्सव : प्रलोभन देकर आदिवासियों का किया जाता है मतांतरण, संत सूर्यानंद गिरी ने कहा- हम सब सनातनी हैं, हिंदू धर्म की रक्षा करें

cy520520 2026-1-14 01:26:03 views 1241
  

मंदार महोत्सव : अखिल भारतीय सनातन समाज के प्रथम महाकुंभ के तीसरे दिन मंगलवार को धर्म सभा का आयोजन किया गया



संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। मंदार पर्वत पर चल रहे अखिल भारतीय सनातन समाज के प्रथम महाकुंभ के तीसरे दिन मंगलवार को धर्म सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हरिद्वार से पहुंचे संत सूर्यानंद गिरी ने संताल समाज को एकजुट होने का संकल्प दिलाया। कहा कि किसी भी प्रलोभन में नहीं आकर सनातन की रक्षा करना है। ऐतिहासिक मंदार पर्वत की तरह अडिग होकर अपने धर्म की रक्षा करना है। आज संताल समाज को षड्यंत्र के तहत तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह तुच्छ मंशा कभी पूरी नहीं होगी।
धर्म सभा में बोले संताल समाज को हो रही तोड़ने की साजिश, कामयाब नहीं होने देंगे

संताल समाज का मंदार का पहला महाकुंभ का उद्देश्य पुरातन धर्म सनातन की रक्षा करना है। फिर 12 साल बाद 2038 में मंदार में दूसरा महाकुंभ लगेगा। अखिल भारतीय सनातन संताल समाज की गुरुमाता रेखा हेंब्रम ने कहा कि मंदार संताल समाज का अराध्य देव है। हमारे गुरु भगवान राम और कृष्ण हैं। पूरे समाज को सनातन की रक्षा के लिए आगे आना होगा। पश्चिम बंगाल से आए सनातन संताल समाज के प्रमुख गंगा प्रसाद मूर्मू ने धर्मांतरण, अंधविश्वास एवं प्रलोभन से समाज को सतर्क रहने के लिए लोगों को जागरूक किया।
पूरे समाज को सनातन की रक्षा के लिए आगे आना होगा: रेखा हेंब्रम

सूर्य नारायण हेंब्रम,त्रिनाथ मूर्मू, गणेश हांसदा, परमेश्वर मूर्मू सहित अन्य ने भी संताल समाज में उर्जा भरने का काम किया। धर्म सभा को विधायक पूरन लाल टूडू ने भी संबोधित करते हुए कहा कि मंदार सनातनियों का बहुत ही बड़ा धार्मिक केंद्र है। संताल महाकुंभ ने संताल समाज को जोड़ने का काम किया है। धर्म सभा में बिहार झारखंड के अलावा नेपाल,असाम, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा सहित अन्य राज्यों से लोग पहुंचे हुए हैं। इधर, मंदार में मकरसंक्रांति के एक दिन पूर्व भी हजारों लोगों ने अस्था की डुबकी लगाई।  
आज महाकुंभ के अंतिम दिन होगा मोक्ष कार्यक्रम एवं अंतिम शाही स्नान

मंदार महाकुंभ के अंतिम दिन बुधवार को मकरसंक्रांति के दिन शाही स्नान व मोक्ष कार्यक्रम होगा। इसमें संताल समाज द्वारा पापहरणी तट पर पूर्वजों, महापुरुषों व बलिदानियों को पिंडदान कर मोक्ष दिया जाएगा। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में संताल समाज के लोग शामिल होंगे। मोक्ष कार्यक्रम में जल, हल्दी,दतवन, मिट्टी,फूल आदि पूजा सामग्रियों से पिंडदान किया जाएगा। लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित भवेश चंद्र झा ने बताया कि मकरसंक्रांति पर पापहरणी स्नान कर दान करने का बहुत ही धार्मिक महत्व है।
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