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Lohri 2026: सिर्फ रेवड़ी-गजक ही नहीं, इन खास चीजों के बिना भी अधूरा है यह त्योहार; पढ़ें इनका महत्व

Chikheang 2026-1-12 14:57:55 views 457
  

इन फूड्स के बिना अधूरा है लोहड़ी का त्योहार (AI Generated)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। लोहड़ी का त्योहार उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में, बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। यह पर्व न केवल फसल की कटाई का उत्सव है, बल्कि कड़ाके की ठंड में एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटने का अवसर भी है।  

लोहड़ी की शाम को पवित्र अग्नि जलाई जाती है, जिसमें तिल, गुड़ और अन्य पारंपरिक चीजें अर्पित की जाती हैं। इस परंपरा का बेहद खास महत्व है। साथ ही, इस त्योहार पर कुछ फूड्स का भी खास महत्व होता है, जिसमें तिल, गुड़, मूंगफली आदि शामिल हैं। आइए जानते हैं लोहड़ी पर खाए जाने वाले इन पारंपरिक फूड्स और उनके महत्व के बारे में।
रेवड़ी और गजक

लोहड़ी का जिक्र होते ही सबसे पहले रेवड़ी और गजक का नाम जुबां पर आता है। ये दोनों ही तिल और गुड़ से बनी होती हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में शरीर को अंदरूनी गर्माहट की जरूरत होती है। तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। तिल जहां आयरन और कैल्शियम का सोर्स है, वहीं गुड़ पाचन में मदद करता है और शरीर को ऊर्जा देता है। इन्हें अग्नि में समर्पित करना इस बात का प्रतीक है कि हम अपनी फसल का पहला अंश ईश्वर को अर्पित कर रहे हैं।

  

(AI Generated
मूंगफली

लोहड़ी की आग के चारों ओर बैठकर मूंगफली चबाना एक पुरानी परंपरा है। मूंगफली को \“गरीबों का काजू\“ कहा जाता है। यह प्रोटीन और गुड फैट्स से भरपूर होती है। लोहड़ी के समय नई मूंगफली बाजार में आती है, इसलिए इसे उत्सव का हिस्सा बनाया गया है। इसे \“अग्नि देवता\“ को भेंट करना समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
पॉपकॉर्न (फुल्ले)

हल्के-फुल्के पॉपकॉर्न न केवल खाने में स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि इन्हें लोहड़ी की आग में \“आहुति\“ के रूप में डाला जाता है। मक्का नई फसल का प्रतीक होता है। अग्नि में पॉपकॉर्न डालने का मतलब है कि हम अपनी पुरानी नकारात्मकता को जलाकर नए और हल्के जीवन की शुरुआत कर रहे हैं।
मक्के की रोटी और सरसों का साग

लोहड़ी के दिन मुख्य भोजन के रूप में मक्के की रोटी और सरसों का साग जरूर बनाया जाता है। यह व्यंजन पूरी तरह से मौसमी और स्थानीय है। सरसों का साग फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है, जबकि मक्का शरीर को भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट देता है। सफेद मक्खन के साथ इसे खाना सर्दियों की डाइट को संतुलित बनाता है। यह डिश किसान की कड़ी मेहनत और धरती मां के प्रति आभार प्रकट करने का तरीका है।
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