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दो दशक से आतंक मचाने वाले खूंखार माओवादी बारसे देवा ने किया आत्मसमर्पण (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में दो दशकों से अधिक समय तक आतंक मचाने वाले माओवादी कमांडर बारसे देवा उर्फ बारसे सुक्का ने शनिवार को हथियार डाल दिया। उसने शनिवार को तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
दरअसल, बारसे देवा पर हिडमा का करीबी सहयोगी और PLGA बटालियन नंबर-1 के कमांडर रहे 48 वर्षीय इस आदिवासी नेता पर 1 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम था। वह दर्जनों बड़े हमलों का जिम्मेदार था, जिसमें सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई।
हिडमा की मौत के बाद से बारसे संगठन संभाल रहा था। लेकिन, कुछ हफ्ते बाद उसने हथियार डाल दिया है। सरेंडर के साथ उसने 48 LMG सहित भारी हथियार और 20 लाख रुपये नकद सौंपे। सुरक्षा अधिकारियों ने इसे दक्षिण बस्तर में माओवादी संगठन के लिए बड़ झटका बताया।
48 वर्षीय वरिष्ठ सीपीआई (माओवादी) कमांडर बारसे देवा उर्फ बरसे सुक्का 2003 में उग्रवादी आंदोलन में शामिल हुआ था। वह 121 से अधिक सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की हत्याओं का जिम्मेदार है। जो बस्तर क्षेत्र में माओवादियों के अंतिम सक्रिय शीर्ष कमांडरों में से एक था।
कहां का रहने वाला है बरसे देवा?
बारसे देवा छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुव्वार्थी गांव के मूल निवासी, कोया जनजाति का रहने वाला है। उसने कक्षा 10 तक पढ़ाई की। उसने 2000 में दंडकारण्य आदिवासी किसान मजदूर संघ (DAKMS) के सदस्य के रूप में भूमिगत गतिविधियां शुरू की। इस दौरान प्रतिबंधित संगठन के राज्य समिति सदस्य (DKSZCM) बन गया। उसका लाल विद्रोहियों के गढ़ माने जाने वाले दक्षिण बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा क्षेत्रों में काफी प्रभाव था।
कई वर्षों तक देवा देश के सबसे वांछित माओवादियों में से एक रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए 1 करोड़ रुपये से अधिक का कुल इनाम घोषित किया गया था। इनमें से अकेले छत्तीसगढ़ पुलिस ने 50 लाख रुपये और तेलंगाना पुलिस ने 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, इसके अलावा अन्य राज्य स्तरीय प्रोत्साहन भी थे।
तेलंगाना और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार देवा दर्जनों प्रमुख माओवादी अभियानों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल था।
फरवरी 2006, एर्राबोरू (सुकमा): आईईडी विस्फोट में 25 सलवा जुडूम सदस्यों की मौत।
मई 2010, सिंगावरम (दंतेवाड़ा): बस विस्फोट में 30 कोया विशेष पुलिस अधिकारियों की मौत और 15 घायल।
मार्च और मई 2016, दंतेवाड़ा: दो अलग-अलग आईईडी हमलों में 12 सीआरपीएफ जवान शहीद।
अप्रैल 2019, कौकोंडा: आईईडी हमले में भाजपा विधायक भीमा मांडवी और 4 सुरक्षाकर्मी शहीद।
अक्टूबर 2011, नेटनार (जीराम घाटी): 6 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
मई 2012, किरंदुल (एनएमडीसी क्षेत्र): 6 सीएसएफ जवान और एक नागरिक ड्राइवर मारे गए।
मार्च 2014, जीराम घाटी: 15 सुरक्षाकर्मी मारे गए (सीआरपीएफ और डीआरजी)।
अप्रैल 2021, टेकुलागुडेम: हाल के वर्षों में हुए सबसे घातक घात लगाकर हमलों में से एक - 22 सीआरपीएफ और डीआरजी जवान मारे गए, 31 घायल हुए; हथियार लूटे गए।
अक्टूबर 2018, नीलावाया: 3 सुरक्षाकर्मी और एक पत्रकार मारे गए। |
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