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ये हैं कानपुर मेडिकल कालेज के डाक्टर, पेड़ के नीचे शुरू हुई बच्चों की पाठशाला को मार्डन क्लास में बदला

Chikheang 2026-1-2 17:57:18 views 844
  

जीएसवीएम मेडिकल कालेज परिसर में संचालित उत्सर्ग पाठशाला में बच्चों का पढातीं मेडिकल छात्रा संस्कृति गुप्ता। जागरण



अंकुश शुक्ल, कानपुर। Special Story: शिक्षा की डोर से बालमन को जोड़ने के लिए जीएसवीएम मेडिकल कालेज में संचालित उत्सर्ग पाठशाला शिक्षित समाज का बेहतर उदाहरण पेश कर रही है। जहां पर मजदूरों को बच्चों को माडर्न स्कूल की तरह शिक्षित किया जा रहा है। एमबीबीएस स्टूडेंट से शिक्षा की डोज लेने के लिए 40 से ज्यादा बच्चे हर दिन पढ़ने पहुंच रहे हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

  

वर्ष 2023 में पेड़ के नीचे से शुरू हुई पाठशाला अब तीन कमरों में बदल चुकी है। जहां बच्चों को इंग्लिश, गणित, विज्ञान के साथ सामान्य ज्ञान और अन्य विषयों का ज्ञान बांटा जा रहा है। पाठशाला के 10 से ज्यादा बच्चे एमबीबीएस स्टूडेंट के प्रयास से ही इस समय शहर के विभिन्न स्कूलों में शिक्षा हासिल कर रहे हैं।

  
हास्टल जाते समय सड़क पर बच्चो ंसे बात करके शुरू की पहल

मेडिकल कालेज के पैरा क्यू टू बैच की स्टूडेंट संस्कृति गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2023 में कालेज से हास्टल जाते समय कुछ बच्चों को सड़क पर खेलते हुए देखा और उनसे बात की। बातों में बच्चों ने पढ़ने की इच्छा जाहिर की। जिसे मैंने अपने बैच के साथियों से साझा किया। इसके बाद सीनियर्स की मदद से इवनिंग पाठशाला की शुरुआत की। जो शुरुआती दिनों में जेके कैंसर अस्पताल परिसर में पेड़ के नीचे करीब सात महीने तक चली। एक दिन कालेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला की नजर पड़ी और उन्होंने हमारे प्रयास की सराहना करते हुए पहल को जारी रखते हुए हमारी पाठशाला को तीन कमरों तक पहुंचा।

  
प्राचार्य उपलब्ध करा रहे पाठ्य सामग्री

शुरुआती समय में बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरत की कापी-किताब और अन्य सामग्री की व्यवस्था सभी सीनियर और बैच के साथियों की ओर से हुई। हालांकि अब अब प्राचार्य पाठशाला के लिए जरूरत की सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। समय-समय पर कैंपस प्रभारी डा. संतोष बर्मन, बाल रोग के वरिष्ठ डा. यशवंत राव और अन्य डाक्टर भी पाठशाला में आकर बच्चों का हौसला बढ़ाते हैं। प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि मेडिकल स्टूडेंट छुट्टी के दिनों में भी घर नहीं जाते और इन बच्चों को पढ़ाते हैं। उनके प्रयास से ही आज मजदूरों के बच्चे इंग्लिश मीडियम वालों पर भारी पड़ रहे हैं। अब उनकी पहल में कालेज भी सहयोग करेगा।

  
पाठशाला में पढ़ा रहे यह एमबीबीएस स्टूडेंट

पैरा क्यू टू बैच की संस्कृति गुप्ता के साथ रोहन मिश्रा, स्वप्निल श्रीवास्तव, सिमरन मौर्या, आस्था, डेजी चौहान, उदित प्रताप सिंह, हर्षित चतुर्वेदी सहित 35 एमबीबीएस स्टूडेंट हर दिन अलग-अलग पढ़ा रहे हैं। जो हर सप्ताह बच्चों की पढ़ाई का टेस्ट माडर्न स्कूल की तरह लेकर उनको शिक्षित कर रहे हैं।

  
इंग्लिश में बात करते बच्चे, सामान्य ज्ञान में अव्वल

जीएसवीएम मेडिकल कालेज में दिसंबर माह में हुए तरंग उत्सव में आयोजित हुई मेडिकल प्रदर्शनी में उत्सर्ग पाठशाला के बच्चों के प्रयास की जमकर सराहना की गई थी। मजदूरों के बच्चों का इंग्लिश में बात करने और सामान्य ज्ञान में सटीकता की सराहना हर कोई कर रहा है। जो बड़े-बड़े स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तरह डाक्टरों से पढ़ाई के दौरान तर्क-वितर्क कर रहे हैं।
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