search

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते से कश्मीरी सेब की कीमतें गिरने का खतरा, घाटी के सेब उत्पादकों की चिंता बढ़ी

Chikheang 2025-12-27 20:27:08 views 1181
  

सेब उत्पादकों की चिंता: न्यूजीलैंड से आयातित सेब से हमारी आजीविका खतरे में पड़ सकती है।



जागरण संवाददाता, श्रीनगर। पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहे घाटी भर के सेब उत्पादकों ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत न्यूजीलैंड से आयातित सेब पर सीमा शुल्क में कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है, उनका कहना है कि इस कदम से स्थानीय उपज की कीमतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उनकी आजीविका खतरे में पड़ सकती है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उत्पादकों के बीच चिंता तब और बढ़ गई है जब घाटी में कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं खुलने वाली हैं। किसानों को डर है कि इस महत्वपूर्ण मोड़ पर घरेलू बाजार में सस्ते आयातित सेब के आने से कश्मीरी सेब की कीमतें गिर सकती हैं, जो वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में रखे हैं और बिक्री के लिए इंतजार कर रहे हैं।

कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स कम डीलर्स यूनियन के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने कहा, जिसका डर था वहीं हुआ। इस कदम से हमारे इस सेब उद्योग को और करारा झटका लगेगा।
हर साल नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है

बशीर ने कहा, हर साल हमारे सेब उद्योग के लिए नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कभी ईरान से सेब आयात किए जाते हैं, कभी अमेरिका और अन्य देशों से, और अब इस सूची में न्यूजीलैंड भी जुड़ गया है। ये घटनाक्रम लगातार हमारे स्थानीय सेब उद्योग पर दबाव डाल रहे हैं।

बशीर ने कहा कि इस तरह के आयात का प्रभाव स्थानीय उत्पादकों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए हानिकारक रहा है जो पहले से ही बढ़ती लागत, अनियमित मौसम, कीटों के हमलों और परिवहन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।बशीर ने कहा, सीमा शुल्क में कमी से आयातित सेब सस्ते हो जाएंगे और व्यापारी स्वाभाविक रूप से उन्हें पसंद करेंगे। इससे बाजार में हमारे सेब की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।
अधिकांश सेब उत्पाद वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में हैं

उत्पादकों ने कहा कि घाटी के अधिकांश सेब उत्पाद वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में हैं। पुलवामा के एक सेब उत्पादक अब्दुल अहद ने कहा, जब कोल्ड स्टोरेज खुलेंगे, तो हम उम्मीद करते हैं कि हमें अपनी लागत वसूलने के लिए उचित कीमतें मिलेंगी। लेकिन अगर आयातित सेब बाजारों में भर जाएंगे, तो हमारी उपज को किनारे कर दिया जाएगा या कम कीमतों पर बेचा जाएगा।

सोपोर के एक अन्य उत्पादक नजीर अहमद वार ने कहा कि स्थानीय उद्योग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार देता है। बागवानों और मजदूरों से लेकर व्यापारियों और ट्रांसपोर्टरों तक, सेब अर्थव्यवस्था घाटी में एक बड़ी आबादी को सहारा देती है। वार ने कहा, कोई भी नीतिगत फैसला जो सेब की कीमतों को नुकसान पहुंचाता है, वह पूरी घाटी को प्रभावित करता है।
हम व्यापार या आयात के खिलाफ नहीं

इधर बशीर अहमद बशीर ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों में प्रवेश करते समय अधिक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, हम व्यापार या आयात के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को ऐसे फैसले लेने से पहले अपने घरेलू उद्योग पर विचार करना चाहिए। स्थानीय किसानों को अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय ज़रूरी हैं।”

उत्पादकों ने यह भी मांग की है कि स्थानीय उपज पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, इसके लिए न्यूनतम आयात मूल्य तंत्र, बेहतर बाज़ार हस्तक्षेप और राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीरी सेब का मज़बूत प्रचार किया जाए।
like (0)
ChikheangForum Veteran

Post a reply

loginto write comments
Chikheang

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1510K

Credits

Forum Veteran

Credits
157953