deltin33 • 2025-12-18 01:47:30 • views 1237
पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले TMC एक बार फिर नागरिकता से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक एजेंडे में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। इसी बीच में TMC के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी जल्द ही बांग्लादेश से वापस आए सोनाली खातून से मुलाकात कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि, यह मुलाकात 19 या 20 दिसंबर को कोलकाता के कालीघाट में हो सकती है।
हालांकि, इसी बीच सोनाली खातून की तबीयत को लेकर चिंता की खबर भी सामने आई है। बांग्लादेश से भारत लौटने के बाद उनकी सेहत अचानक बिगड़ने के कारण उन्हें रामपुरहाट मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों ने सोनाली को विशेष निगरानी में रखा है और फिलहाल परिवार के सदस्यों के अलावा किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई है।
दअरसल, सोनाली खातून पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले की निवासी हैं। जून 2024 में वह उस समय सुर्खियों में आई थीं, जब उन्हें और उनके परिवार को दिल्ली पुलिस ने \“अवैध बांग्लादेशी\“ होने के संदेह में हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें BSF द्वारा बांग्लादेश वापस भेज दिया गया था। उस वक्त सोनाली गर्भवती थीं और उन्हें बांग्लादेश की जेल में भी रहना पड़ा था।
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इस मामले में TMC ने शुरुआत से ही कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने इसे मानवाधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया। सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त टिप्पणी की थी। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा था कि कभी-कभी मानवता के लिए लचीलापन दिखाना जरूरी होता है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोनाली खातून और उनके बच्चे की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने को कहा था। अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि जब सोनाली के पिता भारतीय नागरिक हैं और उन्हें बांग्लादेश नहीं भेजा गया, तो सोनाली को किस आधार पर बांग्लादेशी घोषित किया गया। इसी तर्क के आधार पर सोनाली को भारत वापस लाया गया है।
अभिषेक बनर्जी पहले ही यह संकेत दे चुके थे कि वे सोनाली खातून से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि यह मुलाकात सिर्फ व्यक्तिगत सहानुभूति तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे बंगाल चुनाव से पहले एक बड़े राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। TMC इस मुद्दे के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि वह नागरिकों के अधिकार और मानवीय मामलों में मजबूती से खड़ी रहती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि SIR, नागरिकता, और सीमा से जुड़े मुद्दे आने वाले चुनाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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