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अंडों में नाइट्रोफ्यूरान का दावा वायरल, अधिकारियों ने जांच के लिए अलर्ट जारी किया

cy520520 2025-12-18 00:08:09 views 1235
  

सीतामढ़ी में प्रतिदिन एक लाख अंडे का हो रहा उत्पादन। फाइल फोटो  



जागरण संवाददाता, सीतामढ़ी। nitrofuran in eggs: हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो को लेकर अधिकारी अलर्ट हो गए है। वायरल वीडियो में दावा किया गया कि बाजार में बिकने वाले कुछ अंडों में नाइट्रोफ्यूरान नाम के प्रतिबंधित एंटीबायोटिक के अवशेष मिले हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस दावे के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) ने तुरंत एक्शन लिया। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे ब्रांडेड और अनब्रांडेड दोनों तरह के अंडों के सैंपल इकट्ठा कर जांच कराएं।

हालांकि, जिला पशुपालन पदाधिकारी को इस तरह को कोई आदेश अथवा निर्देश अब तक नहीं मिले है। फिर भी स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से जिला पशुपालन विभाग ने एहतियात के तौर पर जांच करने की बात कही है।

जिला पशुपालन पदाधिकारी डा. प्रेम कुमार झा ने कहा है कि सोशल मीडिया पर अंडों में कैंसर से जुड़े केमिकल नाइट्रोफ्यूरान नामक एंटीबायोटिक पाए जाने की खबर फैल रही है।

नाइट्रोफ्यूरान एक तरह का एंटीबायोटिक दवा है जो कि भारत में प्रतिबंधित है। क्योंकि वो जीन टॉक्सीसिटी से जुड़ा है। यानी कि वो डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। भारत की आफिसियल फूड रेगूरेट्रीबाडी यानी फूड सेफ्टी एंड स्टेंडर्ड आथोरिटी आफ इंडिया के मुताबिक इस केमिकल की थोड़ी सी भी मात्रा की अनुमति नहीं है।

कहा है कि जिला पशुपालन पदाधिकारी को भारत सरकार पशुपालन निदेशालय पटना द्वारा अंडों में नाइट्रोफ्यूरान केमिकल जांच का कोई आदेश अब तक नहीं दिया गया है।

सीतामढ़ी में इस तरह के अंडे बिक्री की कोई सूचना अब तक नहीं है। बताया कि जिले में कुल 23 लेयर फार्मों की सूची उपलब्ध है, जिससे करीब एक लाख अंडे का उत्पादन प्रतिदिन होता है।
नाइट्रोफ्यूरान एंटीबायोटिक हानिकारक

बताया गया है कि नाइट्रोफ्यूरान एक तरह का एंटीबायोटिक है, जो मुर्गियों और दूसरे खाद्य पशुओं में इस्तेमाल करने के लिए भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका कारण यह है कि इसके अवशेष अंडों और मीट में लंबे समय तक रह सकते हैं। ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक संपर्क में आने से यह कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।

इसके अलावा एलर्जी, सांस की तकलीफ, उल्टी-दस्त, लीवर और किडनी को नुकसान पहुंच सकती है। मुर्गियां बीमार न हों, अंडों व चिकन का बढ़िया उत्पादन हो इसके लिए मुर्गी फार्म वाले इसका इस्तेमाल करते हैं। विभागीय अधिकारी का दावा है कि इस तरह की जांच होती है। जिले में अब तक इस तरह की शिकायत नहीं मिली है।


जिले में 23 फार्म संचालित है। यहां प्रतिदिन एक लाख अंडे का उत्पादन हो रहा है। जिले में बिक रहे अंडे में नाइट्रोफ्यूरान होने की कोई सूचना नहीं है और न ही निदेशालय से इस तरह का कोई पत्र अथवा आदेश प्राप्त हुए है।
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डा. प्रेम कुमार झा, जिला पशुपालन पदाधिकारी, सीतामढ़ी
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