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RSS का लक्ष्य व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का निर्माण, क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने संघ के योगदान और भूमिका की जानकारी दी

LHC0088 2025-12-16 05:06:18 views 981
  

आरएसएस के उत्तर पूर्व क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर ने आरएसएस के समाज में योदानों की जानकारी दी।  



संजय कुमार, रांची। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(आरएसएस) व्यक्ति निर्माण का कार्य करता है, वहीं संघ के समविचारी संगठनों का कार्य व्यवस्था परिवर्तन का है। आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस दौरान संघ से प्रेरित अनेकों स्वयंसेवकों ने समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर जरूरत के अनुसार कई संगठनों का निर्माण किया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

उन संगठनों में संघ के स्वयंसेवक कार्यरत हैं, इसलिए वे समविचारी संगठन कहलाते हैं। वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, भारतीय मजदूर संघ, भाजपा, सेवा भारती, आरोग्य भारती, विद्या भारती, विज्ञान भारती, एकल अभियान, हिंदू जागरण, वनवासी कल्याण आश्रम जैसे 42 संगठन संघ के विचारधारा से प्रभावित हैं। झारखंड में विकास भारती बिशुनपुर और हजारीबाग का एक संगठन इससे जुड़ा है।

ये सभी संगठन व्यवस्था परिवर्तन के कार्य में लगे हैं। यह कहना है आरएसएस के उत्तर पूर्व क्षेत्र संपर्क प्रमुख अनिल ठाकुर का। अनिल ठाकुर पूर्व में दक्षिण बिहार के प्रांत प्रचारक और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत संगठन मंत्री रह चुके हैं। वह सोमवार को दैनिक जागरण कार्यालय में जागरण विमर्श के तहत अपनी बात रख रहे थे।

विषय था आरएसएस के समविचारी संगठनों का समाज में योगदान। उन्होंने कहा कि आरएसएस तो वटवृक्ष का रूप ले ही चुका है, सभी समवैचारिक संगठन भी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रमुख स्थान बनाए हुए हैं। चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, या मजदूरों का क्षेत्र। राजनीति का क्षेत्र हो या सेवा का क्षेत्र। विज्ञान का क्षेत्र हो या स्वास्थ्य का क्षेत्र।

संघ से संस्कार प्राप्त स्वयंसेवक इन क्षेत्रों में कार्यरत है, जिसका असर समाज में दिख रहा है। कई क्षेत्रों में बदलाव हुआ है। अनिल ठाकुर ने कहा कि कई समवैचारिक संगठनों के कार्य तो दिखाई देते हैं वहीं कई ऐसे भी संगठन हैं जो समाज में पीछे रहकर कार्य करते हैं। वैसे संगठनों का कार्य कभी-कभी दिखाई देता है।  
पहली बार 1946 में विदेश में संघ कार्य प्रारंभ हुआ

समवैचारिक संगठनों की शुरुआत की चर्चा करते हुए क्षेत्र संपर्क प्रमुख ने कहा कि 1946 में पहली बार दो व्यापारी केन्या जा रहे थे, जो स्वयंसेवक थे। रास्ते में पानी के जहाज में ही प्रार्थना करने के दौरान आपस में परिचय हुआ और केन्या जाकर व्यापार कार्य के साथ-साथ संघ कार्य को भी बढ़ाया।

इस तरह 1946 में विदेश में संघ कार्य प्रारंभ हुआ। उसके बाद विदेश विभाग की स्थापना की गई। मजदूर संघ की स्थापना करनी थी तो दत्तोपंत ठेंगड़ी ने कांग्रेस के मजदूर संघ इंटक में जाकर चुपचाप काम किया। उनके कार्यों को जाना, फिर आकर भारतीय मजदूर संघ की स्थापना की।
घुसपैठ रोकने के लिए समाज को भी जागरूक होना होगा

झारखंड में हो रहे घुसपैठ से संबंधित सवाल के जबाव में कहा कि उसके लिए समाज को जागृत होना होगा। जिस समय बाहरी लोग आकर बस रहे हों उसी समय समाज को विरोध करना चाहिए। सरकार तो अपना काम करेगी ही। मतांतरण से संबंधित सवाल पर कहा कि इसे रोकने के लिए कई संगठन कार्य कर रहे हैं।

घर वापसी भी हो रही है। अब तो मतांतरण कराने के लिए मिशनरी से जुड़े लोग अपना रूप बदल रहे हैं। हिंदू नाम रखकर भी मतांतरण के कार्य में कई लोग लगे हैं। ऐसे लोग समाज के लिए काफी घातक हैं।   
प्रमुख समविचारी संगठन

भारतीय मजदूर संघ, भारतीय किसान संघ, सेवा भारती, भाजपा, विहिप, विद्या भारती, विकास भारती, अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद, अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, लघु उद्योग भारती, क्रीड़ा भारती, संस्कृत भारती, विज्ञान भारती, आरोग्य भारती, स्वदेशी जागरण मंच, सीमा जागरण, वनवासी कल्याण आश्रम, सहकार भारती, एकल अभियान, सक्षम, एनएमओ, राष्ट्र सेविका समिति, प्रज्ञा प्रवाह, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद, भारतीय शिक्षण मंडल आदि।
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