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केरल के राज्यपाल ने कुलपतियों के चयन की प्रक्रिया को लेकर SC की आलोचना की, क्या था शीर्ष अदालत का आदेश?

Chikheang 2025-12-15 01:08:11 views 530
  

लोकतंत्र में संस्थाओं को अपनी सीमाएं जाननी व उनका सम्मान करना चाहिए (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कुलपतियों के चयन की प्रक्रिया को लेकर जारी गतिरोध के बीच केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की आलोचना की, जिसमें जस्टिस सुधांशु धूलिया समिति को डिजिटल विज्ञान, नवाचार एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और एबीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपतियों के नामों की घोषणा करने को कहा गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

राज्यपाल ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक संस्था की अपनी सीमाएं होती हैं और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली की सफलता उन सीमाओं को जानने और उनका सम्मान करने पर निर्भर करती है। राज्यपाल ने पूर्व चीफ जस्टिस एवं केरल के पूर्व राज्यपाल जस्टिस (रिटायर्ड) पी. सथाशिवम को जस्टिस वीआर कृष्ण अय्यर पुरस्कार प्रदान करने के बाद यह बात कही।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

यह पुरस्कार लॉ ट्रस्ट (कानूनी सहायता और कल्याण ट्रस्ट) द्वारा स्थापित किया गया था। अर्लेकर की ये टिप्पणियां हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए उस निर्देश के संदर्भ में आई हैं, जिसमें केरल के दो तकनीकी विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति के लिए एक-एक नाम की सिफारिश करने हेतु जस्टिस (रिटायर्ड) सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है।

यह निर्देश राज्यपाल और केरल के मुख्यमंत्री के बीच इस मुद्दे पर जारी गतिरोध को सुलझाने के प्रयास में दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 दिसंबर को एक आदेश में कहा था कि कोर्ट के प्रयासों के बावजूद आज तक गतिरोध बना हुआ है।

कोर्ट ने जस्टिस सुधांशु धूलिया समिति को प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए वरीयता क्रम में नामों को सीलबंद लिफाफों में उपलब्ध कराने और मुख्यमंत्री के पत्र तथा कुलपति के जवाब पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया। राज्यपाल अर्लेकर ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कन्नूर विश्वविद्यालय के कुलपति संबंधी फैसले में अपने ही प्रविधानों की अनदेखी की है।
राज्यपाल ने क्या कहा?

बहरहाल, राज्यपाल ने केरल हाईकोर्ट की खंडपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। इस आदेश में एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें 27 नवंबर, 2024 को कोचीन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के. शिवप्रसाद को एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त करने वाली अधिसूचना को रद कर दिया गया था।

लोक भवन द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने लोकतंत्र में एक संस्था द्वारा दूसरी संस्था की भूमिका \“हथियाने\“ की प्रवृत्ति की निंदा की है। उन्होंने कहा कि संविधान में संशोधन करने की शक्ति संसद और निर्वाचित विधायिका के पास निहित है, और अदालतें \“संविधान की व्याख्या करने के लिए हैं, न कि संविधान में संशोधन करने के लिए।\“\“ राज्यपाल ने कहा कि एक ही मामले/मुद्दे पर विरोधाभासी व्याख्याएं/निर्णय संविधान की सच्ची भावना के अनुरूप नहीं हैं।

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