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IndiGo फ्लाइट संकट: उस उड़ान की असली लागत जो कभी टेकऑफ नहीं कर पाई

LHC0088 2025-12-7 12:36:49 views 1067
  

IndiGo फ्लाइट संकट।



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक समय था जब एयर पोर्ट पर एक कर्कश आवाज, \“यह...उड़ान के लिए आखिरी कॉल है\“ का मतलब था, घबराहट, जल्दबादी, एक टर्मिनट से दूसरे टर्मिनल की ओर भागना। जब भी कभी आवाज आती थी कि आपकी फ्लाइट में लेट है, तो यह किसी बुरे सपने से कम नहीं था, जो यात्रियों के धैर्य की परीक्षा लेता था। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मगर, आज IndiGo के यात्रियों के लिए, अब यही शब्द आश्वासन की तरह लगते हैं। इसका मतलब है कि उड़ान अभी भी है, क्रू मौजूद है, और यात्रा अभी भी संभव है। पिछले हफ्ते जब रोजाना हजारों की संख्या में उड़ानें रद्द हो रही थीं, तो सौबिक मजूमदार जैसे यात्री हर घोषणा को चेतावनी नहीं, बल्कि आशा के तौर पर देख रहे थे। क्योंकि अब शोर नहीं, बल्कि खामोशी असली खतरे की घंटी बन गई है।
माजूमदार की शादी की यात्रा बनी मुसीबत

पिछला सप्ताह IndiGo के यात्रियों के लिए अभूतपूर्व अराजकता लेकर आया। अचानक टिकट रद की संख्या प्रतिदिन सैकड़ों से लेकर 1,000 से अधिक तक पहुंच गई। विडंबना यह है कि देरी की खबर ने भी कुछ राहत दी।

सौबिक मजूमदार ने अपने भाई की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली से अगरतला के लिए IndiGo की उड़ान एक महीने पहले बुक की थी। लेकिन एक सुखद यात्रा घर के बजाय, उन्हें समय पर समारोह तक पहुंचने के लिए बसों, ट्रेनों और हर चलने वाली चीज की जद्दोजहद में लगना पड़ा।

उन्होंने TOI को बताया, “मैंने एक महीने पहले ही अपना टिकट बुक कर लिया था ताकि मुझे कोई परेशानी न हो। लेकिन नए विमानन कानून के कारण बाद में हुए बदलावों की वजह से मुझे उसी टिकट के लिए अब समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जो मैंने एक महीने पहले बुक किया था।”
अराजकता और मंहगे किराए की मार

पहले देरी हुई, फिर लंबी-लंबी लाइनें और आखिर में फ्लाइट रद, धीरे-धीरे सब कुछ पूरी तरह अराजकता में बदल गया। हवाई अड्डे मछली बाजार जैसे दृश्यों में बदल गए, सामान हर जगह बिखरा पड़ा था।

IndiGo की उड़ान में व्यवधान शुक्रवार को और भी बदतर हो गया, जब एयरलाइन ने प्रमुख शहरों में 1,000 से अधिक उड़ानें रद कर दीं। संकट के दौरान तीन दिनों तक चुप रहने के बाद, CEO पीटर एल्बर्स ने आखिरकार एक वीडियो के जरिए माफी जारी की, जिसमें उन्होंने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद व्यक्त किया। दिल्ली में 235, मुंबई में 104, बेंगलुरु में 102 और हैदराबाद में 84 उड़ानें रद हुईं।

फ्लाइट कैंसिल होने के कारण यात्रियों को दस गुना अधिक किराया चुकाना पड़ा। माजूमदार ने कहा, “वे अब दस गुना अधिक शुल्क ले रहे हैं। ऐसा लगता है जैसे विमानन उद्योग जनता का फायदा उठा रहा है।”

नोमैड ट्रैवल के CEO और TAAl के पूर्व अध्यक्ष अजय प्रकाश ने PTI को बताया, “अगर 10,000 रुपये का टिकट 60,000 रुपये में बेचा जा रहा है, तो मैं इसे कालाबाजारी, मुनाफाखोरी कहूंगा।“ उन्होंने तर्क दिया कि यह क्षेत्र अब पूरी तरह से लाभ के उद्देश्यों से प्रेरित है। यह केवल हवाई किराए तक ही सीमित नहीं था। घोषाल ने बताया कि यहां तक कि कैब के दाम भी तीन गुना हो गए थे।
रिफंड की घोषणा: सिर्फ एक दिखावा?

प्रभावित यात्रियों का समर्थन करने के लिए, IndiGo ने रद की गई उड़ानों के लिए ऑटोमैटिक रिफंड की घोषणा की। एयरलाइन ने कहा, “रद की गई फ्लाइट के लिए सभी रिफंड ऑटोमैटिक आपके खाते में भेज दिया जाएगा। हालांकि, यात्रियों की निराशा रिफंड से कहीं ज्यादा गहरी है।

सुनील डी शालिग्राम ने PTI को बताया कि उनका बेटा 14 घंटे से अधिक समय तक हवाई अड्डे पर फंसा रहा और बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें कोई सहायता नहीं मिली।

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