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दारोगा नौशाद रिजवी पप्पू सिंह बनकर कई महिलाओं का करता रहा यौन शोषण, मतांतरण का भी आरोप

deltin33 2025-12-5 03:06:44 views 1274
  

दारोगा नौशाद रिजवी पप्पू सिंह बनकर कई महिलाओं का करता रहा यौन शोषण



संवाद सहयोगी, जमुई। बरहट थाने में पदस्थापित दारोगा मु. नौशाद रिजवी खुद को पप्पू सिंह बताकर वह कई महिलाओं और लड़कियों को अपने जाल में फंसाता रहा। माथे पर तिलक, बदला हुआ नाम और झूठी पहचान के सहारे वह खुद को राजपूत बता महिलाओं का विश्वास जीतता था। उनका यौन शोषण करता था और मतांतरण भी कराता था।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

पांच वर्ष पहले अनुसूचित जाति की एक महिला के साथ यौन शोषण मामले की गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आरोपित दारोगा की जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे जेल भेज दिया। नौशाद ने 2020 में एक मामले की जांच के दौरान 27 वर्षीया महिला को निशाना बनाया।  

वर्दी का रौब दिखाकर उसने उसे अपने वश में कर लिया। महिला का आरोप है कि दारोगा ने तीन साल तक उसे बरहट और चंद्रमंडी थाने के क्वाटर में रखकर शारीरिक शोषण किया। वह उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचकर इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित कर देने की धमकी देता था।  

पीड़िता की 10 वर्षीय बेटी पर भी दारोगा की नजर पड़ गई। इसके बाद महिला ने हिम्मत कर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन उसे थाने से भगा दिया गया। पीड़िता का कहना है कि उसने तीन साल में जमुई के चार एसपी, डीआईजी और आईजी तक आवेदन भेजा। उसने दारोगा द्वारा इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित की गई तस्वीरें पुलिस अधिकारियों तक भी पहुंचाईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।  

मजबूर होकर उसने 2024 में एससी-एसटी के विशेष मामले के न्यायाधीश की अदालत में परिवाद दायर किया। कुछ अधिवक्ताओं और विशेष लोक अभियोजक मनोज दास ने बिना किसी शुल्क के उसका केस लड़ा। इस मामले में अग्रिम जमानत की अर्जी जिला न्यायालय और हाई कोर्ट से खारिज होने के बाद गुरुवार को दारोगा नौशाद रिजवी न्यायालय में आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हुआ और जमानत की अर्जी दाखिल की।  

एससी-एसटी मामलों के विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण शिवहरे ने सुनवाई के दौरान दारोगा मु. नौशाद रिजवी की जमानत याचिका खारिज कर उसे तत्काल हिरासत में लेकर जेल भेजने का आदेश दिया। वर्तमान में यह दारोगा शेखपुरा में पदस्थापित था।
कई लड़कियों का मतांतरण करा चुका है नौशाद:

अदालत में पीड़िता ने बताया कि नौशाद अब तक कई लड़कियों का मतांतरण करा उन्हें अपना शिकार बना चुका है। चरकापत्थर और अन्य इलाकों की कई महिलाओं की तस्वीरें भी उसने न्यायालय को दिखाईं। फिर भी ज्यादातर महिलाएं समाज और पुलिस से डरकर सामने नहीं आ पाईं।  

शराब पीने, बखेड़ा करने और दुर्व्यवहार की उसकी हरकतें अक्सर चर्चा में रहती थीं, लेकिन किसी अधिकारी ने उस पर सख्त कार्रवाई नहीं की।  

पीड़िता ने अदालत के बाहर कहा कि वह कई बार आत्महत्या के लिए रेलवे स्टेशन तक पहुंच गई थी, लेकिन उसके तीन बच्चों का चेहरा उसे रोक लेता था। वह पूरी तरह टूट चुकी थी, लेकिन अंततः न्यायालय ने उसे राहत दी।
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