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जालंधर में दशहरा पर खुला प्राचीन महाकाली मंदिर, दर्शन के लिए महिलाओं-बच्चों की उमड़ी भारी भीड़

deltin33 2025-10-3 05:36:40 views 1268
  दशहरा पर खुले प्राचीन महाकाली मंदिर के कपाट (फोटो: जागरण)





जागरण संवाददाता, जालंधर। विजयदशमी पर जहां देशभर में रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव मनाया गया, वहीं जालंधर के श्री सिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर स्थित प्राचीन महाकाली मंदिर में भी आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

परिक्रमा मार्ग की ऊपरी मंजिल पर बने इस मंदिर के कपाट वीरवार को महिलाओं और बच्चों के लिए खोले गए, जिसके साथ ही परिसर में श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। राज्यभर से आई महिलाओं और बच्चों ने मां भगवती के दर्शन कर नतमस्तक होकर आशीर्वाद लिया।



मंदिर में केवल दशहरा के दिन ही महिलाओं के प्रवेश की परंपरा है, जो परम तपस्वी मोहनी बाबा द्वारा निर्धारित की गई थी। कहा जाता है कि बाबा ने इसी स्थान पर वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, जिसके उपरांत मां महाकाली की प्रतिमा स्थापित कर यह नियम बनाया गया कि मंदिर के कपाट वर्ष में केवल विजयदशमी पर ही महिलाओं के लिए खुलेंगे।

सुबह हवन-यज्ञ के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। मंदिर के पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच यज्ञ संपन्न करवाया। इसके उपरांत भजन गायकों ने ‘मौज लग गई ए, कोई थोड़ वी ना रही ए’ और ‘अज करके दीदार तेरा जाना’ जैसे भक्ति गीतों से वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। भक्तगण मां के जयघोषों में झूम उठे और दिनभर मंदिर में मेले जैसा माहौल बना रहा।



मंदिर कमेटी के सेवादार योगेश्वर शर्मा और अशोक सोबती ने बताया कि मंदिर की यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। श्रद्धालु इस दिन को अत्यंत शुभ मानते हैं और मां महाकाली के दर्शन से जीवन के समस्त विघ्न-बाधाओं के दूर होने की कामना करते हैं।

भक्तों द्वारा मां महाकाली को विविध व्यंजनों का भोग लगाने के बाद विशाल लंगर का आयोजन किया गया। मंदिर के पुजारी पंडित भूमि प्रसाद ने श्रद्धालुओं को इस परंपरा के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि “मां महाकाली की पूजा अर्चना से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और शक्ति का संचार होता है।
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