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लैंडलाइन की घंटी क्यों नहीं बज रही... मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाराज हैं, जिला प्रशासन को दिए ये दिशा निर्देश

cy520520 2025-11-14 20:36:19 views 884
  

मुख्यमंत्री ने सरकारी कामकाज में सुचारू संचार सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। (प्रतीकात्मक फोटो)



जागरण संवाददाता, मेरठ। कार्यालयों में जब लैंडलाइन फोन की घंटी बजती थी, तो शिकायत का आभास होता था। जबसे मोबाइल आए तब से धीरे-धीरे कर कार्यालयों से लैंडलाइन हटते गए। मोबाइल बजते हैं, लेकिन उनमें शिकायत का आभास नहीं होता। ज्यादातर अधिकारियों के आफिस का लैंडलाइन नंबर या तो खराब हैं या फिर कट चुके हैं। अगर किसी में है भी तो इसकी गारंटी नहीं कि वह उठ ही जाएगा। ऐसी शिकायतों की पुष्टि के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताते हुए सभी जिलों के प्रशासन एवं पुलिस अफसरों को सप्ताहभर में जिला स्तरीय विभागों का लैंडलाइन दुरुस्त व क्रियाशील करवाकर अधिकारियों की सूची पदनाम तैयार करने के लिए कहा है। जिलाधिकारी ने अधीनस्थ विभागों को आदेश जारी कर दिया गया है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

मोबाइल फोन के चलन के साथ लैंडलाइन का उपयोग तेजी से घटा। वर्तमान में अधिकांश सरकारी कार्यालयों से या तो लैंडलाइन फोन के कनेक्शन कट गए हैं अथवा वे क्रियाशील नहीं हैं। मेरठ जनपद की स्थिति यह है कि यहां कुछ प्रमुख अधिकारियों को छोड़कर कहीं भी लैंडलाइन का प्रयोग नहीं हो रहा है। जिला प्रशासन और विकास भवन में तैयार होने वाली विभागों के फोन नंबर की सूची में से लैंडलाइन नंबर गायब हो गए हैं।

कमिश्नर, डीएम, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अलावा इक्का-दुक्का कार्यालय और अधिकारियों के निवास ऐसे हैं जहां वर्तमान में लैंडलाइन फोन चालू है। कलक्ट्रेट परिसर में चार एडीएम कार्यालय में सिर्फ एक में लैंडलाइन है। विकास भवन में तमाम विभागों के बीच सिर्फ सीडीओ कार्यालय का ही लैंडलाइन चालू है। डीएम कार्यालय में उपलब्ध सूची में अधिकारियों के कार्यालय और निवास के लैंडलाइन फोन के नंबर दर्ज तो हैं, लेकिन क्रियाशील इक्का-दुक्का ही हैं। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री द्वारा सभी डीएम और पुलिस अधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि सरकारी कार्यालयों में स्थापित लैंडलाइन फोन के क्रियाशील न होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई है।

कभी 90 हजार से ज्यादा कनेक्शन थे, आज सात हजार भी नहीं : मेरठ जनपद में वर्ष 2005 के आसपास लैंडलाइन फोन की संख्या 90 हजार से भी ज्यादा थी लेकिन मोबाइल के उपयोग के साथ यह घटती गई। एक अप्रैल 2014 को बीएसएनएल लैंडलाइन की जनपद में संख्या 45,204 थी। वर्तमान में लैंडलाइन फोन सात हजार भी नहीं हैं। फाइबर को मिलाकर इनकी संख्या 14,368 है। वर्तमान में अन्य कंपनियों के भी फाइबर लैंडलाइन फोन जनपद में स्थापित हैं।

सीएम कार्यालय के आदेश का पालन कराया जा रहा है : सीएम कार्यालय के आदेश का पालन कराया जा रहा है। सभी विभागों में एक सप्ताह में लैंडलाइन फोन क्रियाशील करा दिए जाएंगे। सभी से इसकी सूची भी मांगी गई है।-डा. वीके सिंह, जिलाधिकारी
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