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चुनावी तामझाम के बीच पंचायतें अब ‘जीपीडीपी’ बनाने में जुटीं, पंचायतों का सतत विकास लक्ष्य पर जोर

Chikheang 2025-10-9 20:06:34 views 1283
  

समग्र विकास के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 की तैयारी।



जागरण संवाददाता, वाराणसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। दूसरी तरफ पंचायतों को इसी साल पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का प्लान भी बनाना है। पंचायती राज विभाग की ओर से पंचायतों को प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इस क्रम में पंचायतों में बैठकें शुरू हो गई हैं। प्रस्ताव सौंपा जा रहा है। द्वितीय चरण की बैठक दिसंबर में होनी है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इसके बाद फाइनल प्रस्ताव पर पंचायतें सर्वसम्मति से मुहर लगाएंगी। इसके बाद शासन से तय पोर्टल व वेबसाइट पर वर्क प्लान फीड होंगे। इसी आधार पर अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए शासन से बजट आवंटित होगा। कुछ ग्राम प्रधानों में इसको लेकर उत्साह है तो कुछ अंजान बने हुए हैं।

किस्मत वालों को मिलेगा मौका
किस्मत वाले ग्राम प्रधानों को अपने प्लान पर कार्य कराने का मौका मिलेगा क्योंकि पंचायत चुनाव मार्च-अप्रैल, 2026 में संभावित है। ग्राम प्रधान जो जीतेंगे वह अपने प्लान पर कार्य कराएंगे वरना नई पंचायतों को एक साल तक इसी आधार पर कार्य करना होगा। नई पंचायतें इसे कितना आत्मसात करेंगी, यह कहना अभी मुश्किल है लेकिन यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा।

ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल
पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) का प्लान बनाने की शुरुआत 2014 में हुई थी। बहुतायत जिले में अनुपालन 2017- 18 में शुरू हुआ। यह भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के तहत एक महत्वपूर्ण पहल है। चुनावी वर्ष में पंचायतें जीपीडीपी को लेकर कितना गंभीर होंगी, यह तो आने वाला समय बताएगा। फिलहाल नियम के तहत प्लान बनेंगे। इसी प्लान के आधार पर अगले वित्तीय वर्ष में वित्त आयोग धनराशि जारी करेगा। यह ग्रामीण समुदायों के समग्र विकास के लिए एक सहभागी योजना है।

सतत विकास के लिए नौ विषय तय
जीपीडीपी योजना के तहत ही पंचायतों को सतत विकास का लक्ष्य (एसडीजी) प्राप्ति के लिए पंचायत राज मंत्रालय ने नौ विषय निर्धारित किए हैं। यह संयुक्त राष्ट्र के देशों की ओर से अंगीकार विषय है। इसमें गरीबी मुक्त गांव, स्वस्थ गांव, बाल मैत्री गांव, पर्याप्त जल मुक्त गांव, स्वच्छ व हरित गांव, आत्मनिर्भर बुनियादी ढ़ांचे वाले गांव, सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव, सुशासन वाला गांव, महिला हितैषी गांव तय है। पंचायतों को प्रत्येक वर्ष इन नौ विषयों को केंद्रीत करते हुए जीपीडीपी प्लान तैयार करना है। शासन का उद्देश्य है कि हर साल भी हम एक लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे तो कुछ वर्षों में समग्र माडल विलेज का सपना पूरा हो जाएगा।

10 साल बाद भी एसडीजी का एक लक्ष्य पूर्ण का दावा नहीं
पिछले 10 साल में पंचायती राज विभाग एक भी गांव को अब तक इन लक्ष्यों से पूरी तरह पूर्ण होने का दावा नहीं कर सका है। यह सार्वजनिक नहीं किया कि इस ब्लाक यह गांव अब पूरी तरह बाल मैत्री गांव हो चुका है। यह गांव सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव हैं। पंचायतें हरसाल प्लान में इन लक्ष्यों को केंद्रीत करती हैं लेकिन धरातल पर नहीं उतार पाती। जिम्मेदार अधिकारी भी इन विषयों को लेकर भी बहुत गंभीर नहीं दिखते हैं।
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