'नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि राजनीति में कोई दुश्मन नहीं होता। केवल प्रतिस्पर्धा होती है। यह बात उन्होंने समयानुकूल की है और वास्तव में उनके द्वारा ऐसा कहे जाने की आवश्यकता थी। इसलिये कि सोलहवीं लोकसभा के चुनाव अभियान में मर्यादा और शिष्टाचार को पूरी तरह से ताक पर रख दिया गया था। इस बार के चुनावों में जिस तरह से व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप लगाये गये थे वैसा पहले कभी नहीं देखा गया था और हमें यह कहने में संकोच नहीं है कि इसका दोष मुख्यत: श्री मोदी और उनकी पार्टी का ही था। श्री मोदी ने स्वयं भी अपनी ओर से विरोधियों पर निजी वार करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यहां तक कि उन्होंने बीच-बीच में चुनाव आयोग की न सिर्फ आलोचना की बल्कि उसे धमकी भी दी। आज जब श्री मोदी चुनाव जीत चुके हैं तब वे शायद यह पुनर्विचार कर रहे होंगे कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर प्रश्र चिन्ह लगाकर उन्होंने भूल तो नहीं की थी!'
(देशबन्धु में 18 मई 2014 को प्रकाशित)
https://lalitsurjan.blogspot.com/2014/05/blog-post_18.html

Deshbandhu Desk
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीराजनीतिलोकसभा के चुनाव
Next Story |