निजामाबाद के बक्शपुर का रहने वाला है आरोपित, 17 फरवरी को दी थी धमकी
आजमगढ़ रोडवेज को उड़ाने का मैसेज भी उसके लैपटाप से हुआ बरामद
जागरण संवाददाता, आजमगढ़। जौनपुर न्यायालय और पुलिस लाइन के गेट को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित विशाल रंजन निवासी बक्शपुर थाना निजामाबाद जनपद आजमगढ़ को लखनऊ एटीएस की टीम ने रविवार को सिधारी थाना क्षेत्र के हड़हा बाबा नरौली स्थित किराए के मकान से गिरफ्तार किया है। एटीएस ने आरोपित के पास से पांच मोबाइल फोन, एक लैपटाप, मेमोरी कार्ड, चार सिम और 21 हजार नकद भी बरामद किया है।
विशाल ने 17 फरवरी 2026 को जौनपुर जिला न्यायाधीश के सरकारी ई-मेल आईडी पर अलग अलग कुल पांच ई-मेल से न्यायालय परिसर व जौनपुर पुलिस लाइन गेट को बम से उड़ाने व मुख्यमंत्री से एक लाख रुपये भिजवाने की धमकी दी थी।
उक्त धमकी भरे ई-मेल की जांच उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा की जा रही थी, विवेचना के क्रम में विशाल रंजन का नाम प्रकाश में आया। एटीएस टीम हड़हा बाबा नरौली के मकान से विशाल को दबोचने में कामयाब रही।
पूछताछ और तलाशी में उसके पास से कई नामों से प्रोटान मेल, जीमेल, आउट लुक की लगभग 50 ई-मेल आईडी प्राप्त हुई एवं अलग अलग नामों से लगभग 20 फेसबुक आईडी मिली, इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया से महिलाओं की तस्वीरें डाउनलोड कर अश्लील कंटेंट भी तैयार किया हुआ प्राप्त हुआ। जांच में उसके लैपटाप से आजमगढ़ रोडवेज को बम से उड़ाने का संबंधित मैसेज तैयार किया हुआ मिला, जिसे उसने अभी तक भेजा नहीं था।
पूछताछ में विशाल ने बताया कि वह जिस लड़की से वह प्यार करता था उसकी शादी जौनपुर के एक लड़के से तय हो गई थी। वह नहीं चाहता था कि लड़की की कहीं भी शादी हो। जिस लड़के से उसकी शादी तय हुई थी उसकी इंटरनेट मीडिया पर फर्जी आईडी बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट कर दिया था, जिसके बाद दोनों पक्ष में पंचायत हुई और विशाल को उस पंचायत में माफी भी मांगनी पड़ी थी।
इसी का बदला लेने के लिए विशाल ने पंचायत में शामिल सभी लोगों के नाम के साथ-साथ अपनी प्रेमिका के मंगेतर के नाम से भी फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर व उनके मोबाइल नंबरों का प्रयोग कर जौनपुर न्यायालय परिसर एवं पुलिस लाइन गेट को बम से उड़ाने की धमकी दिया गया ताकि पुलिस उन सभी लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दे और इसका बदला पूरा हो सके।
पुलिस से बचने के लिए पेड वीपीएन का करता था इस्तेमाल
विशाल पुलिस कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) का पेड वर्जन प्रयोग करता था। इसके साथ ही अलग अलग लोगों से वाइफाई कनेक्शन का इस्तेमाल कर अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करता था। पहचान छिपाने के लिए विशाल अक्सर प्राक्सी मेल का भी इस्तेमाल करता था।
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