केपी सिंह: सेना से रियल एस्टेट किंग तक, DLF और गुड़गांव के निर्माता
नई दिल्ली| शादी के बाद आर्मी की पक्की नौकरी छोड़ना आसान नहीं होता। लेकिन कुशल पाल सिंह उर्फ केपी सिंह (KP Singh Success Story) ने यही जोखिम लिया और देश की सबसे बड़ी लिस्टेड प्रॉपर्टी कंपनी खड़ी कर दी।
94 साल की उम्र में वह अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। साथ ही, उन्हें उस शख्स के तौर पर देखा जाता है, जिसने भारतीय रियल एस्टेट की दिशा और तस्वीर दोनों बदल दीं। आज लोग उन्हें प्रॉपर्टी किंग के नाम से भी जानते हैं।
15 नवंबर 1931 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में जन्मे केपी सिंह के पिता चौधरी मुख्तार सिंह जाने-माने वकील थे। मेरठ कॉलेज से साइंस में ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने लंदन से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पोस्ट-ग्रेजुएशन किया।
1951 में उन्होंने भारतीय सेना जॉइन की और डेक्कन हॉर्स रेजिमेंट में कमीशन हुए। 1954 की गणतंत्र दिवस परेड में उन्होंने अपनी रेजिमेंट का नेतृत्व भी किया।
लेकिन 1961 में उन्होंने बड़ा फैसला लिया। ससुर चौधरी राघवेंद्र सिंह द्वारा 1946 में स्थापित डीएलएफ कंपनी (Delhi Land and Finance Limited) से जुड़ने के लिए उन्होंने आर्मी छोड़ दी। वह कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर बने और जमीन अधिग्रहण से लेकर टाउनशिप डेवलपमेंट तक पूरी रणनीति खुद संभाली।
गुड़गांव को मॉडर्न सिटी बनाया
गुड़गांव, जो कभी एक साधारण गांव था, उसे मॉडर्न सिटी बनाने का श्रेय केपी सिंह को जाता है। किसानों से 3500 एकड़ जमीन खरीदकर उन्होंने डीएलएफ सिटी (DLF City) बसाई, जो आज दिल्ली-एनसीआर (Delhi NCR) का शोपीस प्रोजेक्ट है।
भूकंप-रोधी घर, बड़े शॉपिंग मॉल, कॉरपोरेट ऑफिस और प्रीमियम रिहायशी प्रोजेक्ट, इन सबने DLF को देश की सबसे बड़ी लिस्टेड रियल एस्टेट कंपनी बना दिया। आज DLF का मुख्यालय दिल्ली में है और उनके बेटे राजीव सिंह चेयरमैन हैं।
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2010 में मिला था पद्म भूषण
केपी सिंह को साल 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित भी किया गया था। इसके अलावा साल 2008 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में मान्यता दी। 2011 में उन्हें \“आंत्रप्रेन्योर ऑफ द ईयर\“ अवॉर्ड भी मिला।
कंट्रोवर्सी में भी रहे हैं केपी सिंह
साल 2016 में केपी सिंह का नाम पनामा पेपर्स लीक में सामने आया था। यह 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेजों का खुलासा था, जो पनामा की कॉरपोरेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी मॉसैक फोन्सेका से जुड़े थे।
इन दस्तावेजों में केपी सिंह, उनकी पत्नी, उनके बेटे, बेटी पिया और उनके दामाद टिम्मी सरना के नाम शामिल थे। आरोप था कि इन लोगों ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में ऑफशोर कंपनियां स्थापित की थीं।
हालांकि, इसके बाद साल 2017 में केपी सिंह ने DLF की रेंटल आर्म में अपनी एक-तिहाई हिस्सेदारी सिंगापुर के सॉवरेन वेल्थ फंड GIC को 1.9 बिलियन डॉलर में बेची।
2020 में पांच दशक से ज्यादा समय तक चेयरमैन रहने के बाद उन्होंने पद छोड़ा और अब चेयरमैन एमेरिटस हैं। वह ज्यादातर समय लंदन और दुबई में बिताते हैं।
₹190 करोड़ में बिका एक अपार्टमेंट
DLF का अल्ट्रा-लक्जरी प्रोजेक्ट \“द कैमेलियास\“ देश की सबसे महंगी प्रॉपर्टी में गिना जाता है। 17.5 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में फ्लैट्स की कीमत 100 करोड़ से 175 करोड़ रुपए तक है। हाल ही में एक अपार्टमेंट 190 करोड़ रुपए में बिका, जिससे यह फिर चर्चा में आ गया।
फोर्ब्स की 2024 सूची में केपी सिंह (KP Singh) भारत के 100 सबसे अमीर लोगों में 12वें स्थान पर रहे। फोर्ब्स के रियल टाइम बिलिनेयर इंडेक्स के मुताबिक, उनकी नेटवर्थ 13.2 बिलियन डॉलर (1.19 लाख करोड़ रुपए) है।
91 साल की उम्र में प्यार में पड़े थे केपी सिंह
केपी सिंह के तीन बच्चे हैं- पिया सिंह, रेनुका तलवार और राजीव सिंह। साल 2018 में उनकी पत्नी का निधन हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि केपी सिंह ने 91 साल की उम्र में दूसरी बार प्यार भी पाया। जिसे लेकर वह काफी चर्चा में भी रहे।
फिलहाल केपी सिंह की जिंदगी बताती है कि बड़ा जोखिम, लंबी सोच और धैर्य इनसे ही असली साम्राज्य खड़े होते हैं।
केपी सिंह से जुड़े FAQ
कुशल पाल सिंह उर्फ केपी सिंह कौन हैं?
केपी सिंह एक भारतीय अरबपति रियल एस्टेट डेवलपर और DLF लिमिटेड के पूर्व चेयरमैन हैं। वर्तमान में वे DLF के चेयरमैन एमेरिटस हैं।
केपी सिंह ने कहां तक पढ़ाई की है?
केपी सिंह ने मेरठ कॉलेज से साइंस में स्नातक (ग्रेजुएशन) किया। इसके बाद उन्होंने यूनाइटेड किंगडम (UK) में एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
केपी सिंह को कौन-कौन से पुरस्कार मिले हैं?
उन्हें साल 2010 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। साल 2008 में फोर्ब्स ने उन्हें दुनिया के 8वें सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में मान्यता दी। 2011 में उन्हें \“आंत्रप्रेन्योर ऑफ द ईयर\“ अवॉर्ड भी मिला। इसके अलावा कई अन्य सम्मान भी प्राप्त हुए।
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