इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। ब्रिटेन के एआइ और आनलाइन सुरक्षा मंत्री कनिष्क नारायण शनिवार को शहर में होंगे। वे एसकेजे ला कालेज में डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करना और एआइ नवाचार को आगे बढ़ाना विषय पर व्याख्यान देंगे।
मौके पर एमएलसी डा.संजय कुमार सिंह व सिकटा विधायक समृद्ध वर्मा भी रहेंगे। कालेज की ओर से कनिष्क नारायण को सम्मानित भी किया जाएगा। वह इंग्लैंड में एमपी बने हैं।
यूके (यूनाइटेड किंगडम) के वेल्स से लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप सांसद निर्वाचित हुए हैं। उनका मूल निवास दामूचक स्थित सोधों हाउस है। कनिष्क नारायण ब्रिटेन में रहने वाले एशियाई मूल के अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि के साथ छात्रवृत्ति के साथ इटेन, आक्सफोर्ड व स्टैनफोर्ड अमेरिका से पढ़ाई पूरी की।
इटेन लंदन का सबसे प्रसिद्ध स्कूल है। यहीं से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने भी पढ़ाई की थी। आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र की पढ़ाई करने के बाद कनिष्क अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से आगे की पढ़ाई पूरी की।
ला की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी
मुजफ्फरपुर : बीआरए बिहार विश्वविद्यालय ने एलएलबी व प्री ला की परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। संबंधित कालेजों में शनिवार को एडमिट कार्ड का वितरण होगा।
कालेज प्रशासन की ओर से एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद इस पर मुहर व प्राचार्य के हस्ताक्षर के बाद विद्यार्थियों को जारी होगा। उल्लेखनीय है कि सोमवार से एलएलबी व प्री ला की परीक्षा शुरू हो रही है। परीक्षा पांच मार्च तक होनी है।
पीजी में फीस देकर नामांकन करा चुके विद्यार्थी चिंतित
मुजफ्फरपुर। पहली मेरिट लिस्ट के आधार पर फीस देकर बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के विभिन्न पीजी विभागों और कालेजों में नामांकन कराने वाले विद्यार्थियों की चिंता बढ़ गई है।
छात्र-छात्राएं लगातार विश्वविद्यालय पहुंचकर जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। शुक्रवार को भी कई विद्यार्थी विश्वविद्यालय पहुंचे। दूसरी ओर, पीजी विभागाध्यक्ष भी विश्वविद्यालय से पीजी नामांकन में फीस लिए जाने को लेकर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय की ओर से नया आदेश तब जारी किया गया जब नामांकन की तिथि के केवल तीन दिन बचे थे।
इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
कई विभागाध्यक्षों ने बताया कि एससी-एसटी वर्ग में अधिक अंक प्राप्त कर अनरिजर्वड कैटेगरी में आने वाले विद्यार्थियों की फीस लेनी है या नहीं, इस पर कोई गाइडलाइन नहीं दी गई है। इससे प्राचार्यों और पीजी विभागाध्यक्षों की परेशानी बढ़ गई है।
वहीं, छात्र-छात्राओं से लिया गया शुल्क कब लौटाया जाएगा, इसकी जानकारी भी वे प्राप्त कर रहे हैं। शुल्क समेत अन्य मामलों को लेकर विश्वविद्यालय की ओर से जल्द ही नामांकन समिति की बैठक बुलाई जानी है।
उल्लेखनीय है कि कई पीजी विभागों में छात्राओं का नामांकन अधिक है। कामर्स जैसे विषयों में बगैर फीस नामांकन कराने वाली सूची में विद्यार्थियों की संख्या करीब 90 प्रतिशत है। |
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