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अरबों गैलन पानी और बिजली की भारी खपत... AI से एक सवाल का जवाब पाना कितना महंगा? हैरान कर देंगे आंकड़े

Chikheang 1 hour(s) ago views 84
  

AI के एक प्रॉम्प्ट के पीछे की लागत सुनकर हो जाएंगे शॉक्ड (AI द्वारा जनरेटेड फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज करोड़ों लोग रोजमर्रा के सवालों के जवाब पाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। हमें बस कुछ शब्द टाइप करने होते हैं और जवाब तुरंत मिल जाता है। लेकिन इस आसान दिखने वाली प्रक्रिया के पीछे बड़े-बड़े डेटा सेंटर काम करते हैं, जो भारी मात्रा में बिजली और पानी का इस्तेमाल करते हैं।

हाल ही में OpenAI ने बताया कि उसके AI सिस्टम को रोज करीब 2.5 अरब प्रॉम्प्ट मिलते हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि एआई का पर्यावरण पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है। अनुमान के मुताबिक, एक प्रॉम्प्ट में लगभग 0.34 वॉट-घंटा बिजली खर्च होती है। यह उतनी ऊर्जा है जितनी एक साधारण LED बल्ब को करीब दो मिनट जलाने में लगती है।

  

अगर कोई व्यक्ति रोज एआई का इस्तेमाल करता है तो उसकी खपत लगभग 6.8 वॉट-घंटा प्रतिदिन तक पहुंच सकती है। अब जब यही इस्तेमाल लाखों लोगों द्वारा किया जाता है तो आंकड़े काफी बड़े हो जाते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े?

  • 10 लाख यूजर्स रोज करीब 6800 किलोवॉट-घंटा बिजली खर्च करेंगे।
  • यह अमेरिका के लगभग 225 घरों की एक दिन की खपत के बराबर है।
  • 10 करोड़ यूजर्स होने पर यह आंकड़ा बढ़कर 6 लाख 80 हजार किलोवॉट-घंटा हो जाता है।
  • यह करीब 22 हजार घरों की रोजाना बिजली खपत के बराबर है।
  • भारत जैसे देशों में, जहां करोड़ों लोग AI का इस्तेमा कर रहे हैं इसका असर और भी बड़ा हो सकता है।

पानी की भी पड़ती है जरूरत

बिजली के अलावा, डेटा सेंटर को ठंडा रखने के लिए बड़ी मात्रा में पानी भी चाहिए। गूगल की 2024 पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार, उसके डेटा सेंटरों ने साल 2023 में 6.1 बिलियन गैलन ताजा पानी का इस्तेमाल किया। यह पिछले साल के मुकाबले 17% ज्यादा था।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञ कहते हैं कि तुलना भी जरूरी है। एआई विशेषज्ञ स्टुअर्ट रसेल ने कहा कि AI इंफ्रास्टक्चर संसाधन जरूर इस्तेमाल करता है, लेकिन कुछ अन्य उद्योग इससे कहीं ज्यादा पानी खर्च करते हैं।

  

उदाहरण के लिए, अमेरिका में गोल्फ कोर्स हर साल सैकड़ों अरब गैलन पानी इस्तेमाल करते हैं, जो AI डेटा सेंटरों से कहीं ज्यादा है। इससे चिंता खत्म नहीं होती, लेकिन यह दिखाता है कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उसके पर्यावरणीय असर को समझना और संभालना जरूरी होगा।
\“प्लीज\“ और \“थैंक यू\“ भी बढ़ाते हैं खर्च?

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने भी AI की ऊर्जा खपत पर ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां जब चैटबॉट से बात करती हैं तो \“प्लीज\“ और \“थैंक यू\“ जैसे शिष्ट शब्द भी लिखती हैं। इस पर उन्होंने मजाक में कहा कि ऐसा करना भले ही शिष्टाचार हो, लेकिन यह इंसान नहीं है और इससे ज्यादा कंप्यूटिंग पावर लगती है, इसलिए बेहतर है कि ऐसा न करें।

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