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फाल्गुन अमावस्या पर करें इस स्तोत्र का पाठ (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। फाल्गुन अमावस्या का दिन हिंदू धर्म में पितरों की शांति और तर्पण के लिए बेहद खास माना जाता है। साल 2026 में यह दिन उन लोगों के लिए एक सुनहरा अवसर लेकर आ रहा है जो पितृ दोष से परेशान हैं या अपने जीवन में सुख-शांति चाहते हैं।
पितृ दोष से मुक्ति का महा उपाय
पितृ दोष के कारण अक्सर परिवार में कलह, संतान प्राप्ति में बाधा या आर्थिक तंगी बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, फाल्गुन अमावस्या पर किए गए कुछ विशेष कार्य इन समस्याओं को जड़ से खत्म कर सकते हैं।
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पितृ दोष निवारण स्तोत्र का महत्व
शास्त्रों में वर्णित है कि पितृ दोष निवारण स्तोत्र का पाठ करना इस दिन सबसे प्रभावशाली माना जाता है। अगर आपके काम बनते-बनते बिगड़ रहे हैं, तो इस दिन पवित्र नदी में स्नान के बाद पितरों के निमित्त धूप-दीप जलाकर इस स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
पितृ शांति के सरल उपाय
अमावस्या के दिन आप कुछ आसान तरीकों से भी लाभ पा सकते हैं:
तर्पण और दान: सुबह उठकर किसी पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिले पानी से स्नान करें। इसके बाद काले तिल और जल से पितरों का तर्पण करें।
पीपल की पूजा: मान्यताओं के अनुसार, पीपल के पेड़ में पितरों का वास होता है। अमावस्या पर पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और परिक्रमा करना अत्यंत शुभ होता है।
भोजन का दान: इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को सात्विक भोजन कराएं। गाय, कुत्ते और कौवे को ग्रास निकालना न भूलें।
विशेष मंत्र और विधि
पूजा के दौरान “ॐ पितृभ्य: नम:“ मंत्र का जप करना चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, श्रद्धा के साथ किया गया छोटा सा दान भी पितरों को संतुष्ट कर देता है। इस दिन सात्विकता का पालन करना और तामसिक भोजन से दूर रहना अनिवार्य है।
पितृ निवारण स्तोत्र
अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम् । नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।।
इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा । सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान् ।।
मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा । तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि ।।
नक्षत्राणां ग्रहाणां च वाय्वग्न्योर्नभसस्तथा । द्यावापृथिवोव्योश्च तथा नमस्यामि कृताञ्जलि:।।
देवर्षीणां जनितृंश्च सर्वलोकनमस्कृतान् । अक्षय्यस्य सदा दातृन् नमस्येहं कृताञ्जलि: ।।
प्रजापते: कश्पाय सोमाय वरुणाय च । योगेश्वरेभ्यश्च सदा नमस्यामि कृताञ्जलि: ।।
नमो गणेभ्य: सप्तभ्यस्तथा लोकेषु सप्तसु । स्वयम्भुवे नमस्यामि ब्रह्मणे योगचक्षुषे ।।
सोमाधारान् पितृगणान् योगमूर्तिधरांस्तथा । नमस्यामि तथा सोमं पितरं जगतामहम् ।।
अग्रिरूपांस्तथैवान्यान् नमस्यामि पितृनहम् । अग्रीषोममयं विश्वं यत एतदशेषत: ।।
ये तु तेजसि ये चैते सोमसूर्याग्रिमूर्तय:। जगत्स्वरूपिणश्चैव तथा ब्रह्मस्वरूपिण: ।।
तेभ्योखिलेभ्यो योगिभ्य: पितृभ्यो यतामनस:। नमो नमो नमस्तेस्तु प्रसीदन्तु स्वधाभुज ।।
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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है। |
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