प्रदीप द्विवेदी, मेरठ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की पहली नमो भारत और सबसे आधुनिक मेट्रो का शुभारंभ करेंगे, इसके साथ रैली को भी संबोधित करेंगे। भाजपा ने इसे लगभग चुनावी रैली का रूप दे दिया है और लक्ष्य रखा गया है एक लाख लोगों की उपस्थिति। ऐसे में यह कार्यक्रम केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर लांच नहीं बल्कि पश्चिमी उप्र की राजनीति में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद नई हलचल और नए समीकरण का उद्घाटन है।
किसी रैली में इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना साधारण बात नहीं होती। यह केवल भीड़ प्रबंधन नहीं, बल्कि बूथ स्तर तक की सक्रियता का परिणाम होता है। तैयारी के अनुरूप यदि इतनी संख्या एकत्र हो पाती है तो यह रैली विपक्ष के लिए चुनौती बन जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पश्चिम यूपी से यदि माहौल बनाया गया, तो उसका असर पूरे प्रदेश में जाएगा। ऐसे में 22 फरवरी का यह आयोजन केवल मेट्रो और नमो भारत का उद्घाटन नहीं, बल्कि 2027 की राजनीतिक पटकथा का शुरुआती अध्याय भी माना जा सकता है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि वे चुनावी नहीं बल्कि इमोशनल मोड में रहते हैं फिर भी यह रैली भावनात्मक जुड़ाव और विकास के प्रतीकों के जरिए चुनावी मोड में पहुंचाने का ही आयोजन बनेगी। आयोजन से एक दिन पहले यानी 21 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं मेरठ पहुंचकर तैयारियों की समीक्षा करेंगे।
योगी ने हाल ही में लखनऊ में मेरठ के जनप्रतिनिधियों के साथ इसकी तैयारी को लेकर बैठक की फिर उसके बाद अधिकारियों के साथ उन जनप्रतिनिधियों ने सर्किट हाउस में योजना बनाई।
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मुख्यमंत्री की सीधी निगरानी से यह स्पष्ट संदेश देती है कि इस आयोजन को राजनीतिक लाभ में परिवर्तित करने के लिए पार्टी और सरकार कितनी गंभीर है। जिस क्षेत्र में जातीय और सामाजिक समीकरणों में किसान तथा शहरी मतदाताओं की बराबर भूमिका है, उस क्षेत्र में इतनी बड़ी रैली का आयोजन साधारण नहीं माना जा सकता। नमो भारत और मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट विकास की राजनीति का प्रतीक हैं।
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भाजपा इन्हें डबल इंजन सरकार की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही है। बदलते मौसम में अब सूरज की गर्मी बढ़ रही है तो वहीं अब राजनीतिक ताप भी बढ़ता जाएगा। इस रैली से भाजपा अपने व्यापक नेटवर्क का शक्ति सम्मेलन करेगी, प्रधानमंत्री मोदी की लगातार बनी रहने वाली लोकप्रियता का प्रदर्शन करेगी।
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