देवताओं में सबसे पहले गणेश जी ही क्यों? (Image Source: AI-Generated)
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। वहीं, किसी भी मांगलिक काम, विवाह या नए काम की शुरुआत करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रीगणेश की साधना करने से सभी काम सफल होते हैं और शुभ परिणाम मिलते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 33 कोटि देवी-देवताओं में से गणपति बप्पा की पूजा शुभ काम से पहले क्यों की जाती है। अगर नहीं पता, तो आइए जानते हैं कि इससे जुड़ी कथा के बारे में।
सर्वप्रथम क्यों होती है भगवान गणेश की पूजा?
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवताओं के बीच सर्वश्रेष्ठ को विवाद छिड़ गया। हर कोई देवता अपने आप को प्रथम पूज्य मान रहे थे। ऐसे में देवी-देवता इस समस्या का समाधान पाने के लिए भगवान शिव और माता पार्वती के पास पहुचें।
तब शिव जी ने एक प्रतियोगिता रखी। उन्होंने कहा कि जो पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करके सबसे पहले लौटेगा। वही प्रथम पूज्य कहलाएगा। इसके बाद सभी देवता ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। इस दौड़ में गणेश जी भी शामिल हुए, लेकिन उन्होंने ब्रह्मांड की परिक्रमा नहीं लगाई। इसके बदले में उन्होंने भगवान शिव और मां पार्वती की परिक्रमा की।
जब आखिरी में सभी देवता ब्रह्मांड की परिक्रमा लगाकर आए। तब महादेव ने गणेश जी को विजेता घोषित कर दिया। तब गणेश जी ने कहा कि माता-पिता के चरणों में ही समस्त तीर्थ और ब्रह्मांड वास करते हैं। उनके इस काम से महादेव बेहद प्रसन्न हुए और गणपति बप्पा को वरदान दिया की कि किसी भी शुभ काम को करने से पहले गणेश की पूजा अनिवार्य होगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तभी से तभी से भगवान गणेश \“विघ्नहर्ता\“ और \“प्रथम पूज्य\“ कहलाए।
ऐसे करें भगवान गणेश को प्रसन्न
जीवन की बाधाओं को दूर को करने के लिए बुधवर के दिन सुबह स्नान करने के बाद भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करें। प्रभ को 21 दूर्वा की गांठें अर्पित करें। इस दौरान \“ॐ गं गणपतये नमः\“ मंत्र का जप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय को करने से जीवन की बाधाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति बनी रहती है।
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