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31 जनवरी से शुरू हुआ 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का समापन।
जागरण संवाददाता, फरीदाबाद। 31 जनवरी से शुरू हुआ 39वें अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का बड़ी खूबसूरती के साथ रविवार को समापन किया गया। मेला का अंतिम दिन और ऊपर से रविवार होने के कारण आम दिनों की तुलना में अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचे। सुबह से ही मेला परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लग गई थी, दोपहर तक तो परिसर से लेकर फूड कोट और मुख्य तथा छोटी चौपाल पर लोगों का हुजूम नजर आया।
चौपल पर बैठने के लिए कुर्सियां कम पड़ने की वजह से पर्यटकों ने नीचे खड़े होकर देश और विदेश के कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुति को देखा। मेला प्रबंधन के अनुसार सिर्फ रविवार को मेला देखने के लिए करीब तीन लाख लोग पहुंचे थे। वहीं 16 दिनों में करीब 20.44 लाख लोगों ने मेला का दीदार किया है। जबकि करीब 45.44 करोड़ का व्यापार हुआ है।
दिनभर हुई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति
सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में मुख्य चौपाल पर देश और विदेश से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रविवार को विदेशी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति देकर अपनी संस्कृति को प्रदर्शित किया। मुख्य चौपाल पर सबसे पहले पार्टनर कंट्री मिस्र और इराक, नाइजर, इथियोपिया, रूस व साउथ सूडान से आए कलाकारों ने प्रस्तुतियां दी। विदेशी कलाकारों के पारंपरिक नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक झलकियों ने दर्शकों को अपने-अपने देशों की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया।
वहीं पूर्व संध्या आयोजित हुए फैशन शो कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वेशभूषा से सजे माडल्स ने एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों की प्रसिद्ध साड़ियों और परिधानों को मंच पर प्रदर्शित किया गया। मुख्य चौपाल के मंच पर फैशन शो में आर्टिस्ट्स द्वारा बनारसी, कांजीवरम, पटोला, चंदेरी, भागलपुरी और फुलकारी जैसी पारंपरिक साड़ियों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
झूला हादसा छोड़ गया अव्यवस्था की लकीर
मेला में सात फरवरी की शाम अचानक सुनामी झूला के गिर जाने से मेला की खुशियां मातम में बदल गई थी। हंसी और उत्साह की जगह अचानक चींख और पुकार मच गई थी। सात फरवरी को हुए हादसे में 12 लोग घायल हो गए थे। घायलों को बचाते हुए इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद बलिदान हो गए थे। इस हादसे ने सभी को झकझोर दिया था।
सिस्टम की लापरवाही के कारण हुए हादसे में घायलों का इलाज जिला नागरिक बादशाह खान अस्पताल और सुप्रीम अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हादसे के बाद मुख्य चौपाल पर कार्यक्रम रोक दिए गए गए थेअगले दिन रविवार को दोपहर दो बजे कलाकारों ने दो मिनट का मौन धारण कर बलिदान इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को श्रद्धांजलि दी थी। अगले दिन मेला फिर से गुलजार हुआ है।
45.44 करोड़ का व्यापार, सेल के कारण अधिक हुई खरीदारी
मेला प्रबंधन का दावा है कि इस बार पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं। वहीं कारोबार में भी वृद्धि हुई है। मेला प्रबंधन के अनुसार इस बार 45.44 करोड़ का मेला में कारोबार हुआ है। मेला के अंतिम दिनों में लगाए गए सेल से अधिक असर पड़ा है। अंतिम सप्ताह में सबसे अधिक खरीदारी हुई है। वहीं मेला में इस बार करीब 20.44 लाख लोगों ने मेला का दीदार किया है। बीते वर्ष सूरजकुंड मेला में 18.10 लाख लोगों ने मेला देखा था। जबकि 28 करोड़ का व्यापार हुआ था।
अगले साल नहीं लगेगा सुनामी झूला
हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अगले साल सुनामी झूला नहीं लगाया जाएगा। मेला में हुए झूला हादसा को लेकर यह फैसला लिया गया है। मेला में छोटे झूले होंगे। उनकी भी सुरक्षा के मद्देनजर पूरी जांच होगी। इसके बाद भी मेला परिसर में झूला लगाने की अनुमति दी जाएगी। जिससे भविष्य में सात फरवरी की घटना दोबारा न हो सके।
इस बार शिल्पियों को मिले थे पक्के स्टॉल
मेला प्रबंधन के मुताबिक इस बार मेला में पिछले वर्ष के मुकाबले सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया गया था। मेला में सुरक्षा के मद्देनजर 800 कैमरे लगाए गए थे। जबकि अतिरिक्त दस करोड़ रुपये खर्च करके पक्के स्टाल लगाए गए थे। जिससे वर्षा की स्थिति में स्टाल संचालकों के सामान की सुरक्षा हो सके। वहीं मेला में तीन फूड स्टाल बनाए गए गए थे, जहां थीम स्टेट उत्तर प्रदेश और मेघालय सहित अन्य प्रदेश के व्यंजनों का जायका चखने का पर्यटकों को मौका मिला।
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