धार भोजशाला विवाद- इंदौर हाई कोर्ट में आज सुनवाई (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में आज से सुनवाई प्रारंभ होगी। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला व न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच में यह प्रकरण क्रम संख्या- 62 पर सूचीबद्ध किया गया है।
यह सुनवाई गत 22 जनवरी को दिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर शुरु हो रही है। इस दौरान भोजशाला को लेकर किए गए एएसआइ सर्वे की रिपोर्ट खुली अदालत में पेश की जाएगी और उसकी कापी दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा खोला नहीं जा सकता है तो उसका दोनों पक्ष अपने विशेषज्ञों व वकीलों की मौजूदगी में निरीक्षण कर सकते हैं। इसके बाद पार्टियों को अपनी आपत्तियां व सिफारिशें दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाएगा। इसके बाद हाई कोर्ट मामले की अंतिम सुनवाई कर सकता है। अंतिम सुनवाई के समय सभी आपत्तियों पर विधिवत विचार किया जा सकता है।
एएसआइ सर्वे को आधार बनाकर रखेगा पक्ष
बता दें कि हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के समक्ष सुनवाई में याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फार जस्टिस एएसआइ सर्वे को आधार बनाकर भोजशाला के वाग्देवी (देवी सरस्वती मंदिर) होने के पक्ष में अपने तर्क रखेगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन व अधिवक्ता विनय जोशी पैरवी करेंगे।
किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय तक भोजशाला की संरचना एवं स्वरूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसका सात अप्रैल 2003 को एएसआइ महानिदेशक द्वारा जारी आदेश यथावत प्रभावी रहेगा।
एएसआइ सर्वे के प्रमुख निष्कर्ष-
17000 अवशेष मिले थे। 96 मूर्तियां प्राप्त हुईं। 25 फीट से अधिक खुदाई में दीवार का ढांचा मिला। पीछे के खेत क्षेत्र से भी मूर्तियां बरामद की गईं। चारों दिशाओं में 106 स्तंभ पाए गए। 82 भित्ति चित्रयुक्त स्तंभ मिले। 33 प्राचीन सिक्के मिले। ये सिक्के 10वीं-11वीं शताब्दी एवं परमार युग के बताए गए हैं। |
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