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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (CCEA) ने देश के पहले अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल टनल प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन को मंजूरी दे दी है। नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लगभग 18,662 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जाएगा।
हालांकि पानी के नीचे बनी ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल टनल असम में होगी, लेकिन इसका असर राज्य के बाहर भी होगा। अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और दूसरे नॉर्थईस्ट इलाकों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
कितनी है लंबाई?
भारत के पहले अंडरवाटर ट्विन ट्यूब रोड-कम-रेल टनल प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 34 किमी. होगी। इस प्रोजेक्ट में दो पैरेलल टनल होंगी, जिन्हें रोड और रेल ट्रैफिक दोनों के आसान और हाई-कैपेसिटी मूवमेंट को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत NH-15 पर गोहपुर से NH-715 पर नुमालीगढ़ तक 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड कनेक्टिविटी कॉरिडोर बनाया जाएगा, जिसमें ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 15.79 km की रोड-कम-रेल टनल भी शामिल है।
यह प्रोजेक्ट इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) मोड के तहत पूरा किया जाएगा। पूरा होने के बाद यह भारत की पहली अंडरवाटर रोड-कम-रेल टनल और दुनिया की दूसरी ऐसी टनल बन जाएगी। प्रोजेक्ट का कंस्ट्रक्शन पांच साल में पूरा होने की उम्मीद है।
क्या है इसका महत्व?
असम में अंडरवाटर ट्विन टनल प्रोजेक्ट पूरा होने पर गोहपुर और नुमालीगढ़ के बीच की दूरी 240 किमी. से घटकर सिर्फ 34 किमी. रह जाएगी और यात्रा का समय लगभग 6 घंटे से घटकर सिर्फ 20 मिनट रह जाएगा।
अभी NH-715 पर नुमालीगढ़ और NH-15 पर गोहपुर के बीच कनेक्टिविटी NH-52 पर सिलघाट के पास मौजूदा कालियाभोमोरा रोड ब्रिज के जरिए लगभग 240 किमी. तक फैली हुई है। इस सफर में लगभग छह घंटे लगते हैं, जो नुमालीगढ़, काजीरंगा नेशनल पार्क और बिश्वनाथ शहर से होकर गुजरता है।
इस प्रोजेक्ट से औसत ट्रैवल स्पीड भी दोगुनी होने की उम्मीद है। इससे असम और अरुणाचल प्रदेश को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी मिलेगी। कनेक्टिविटी के अलावा, इस मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से नॉर्थईस्ट में टूरिज्म को बढ़ावा मिलने, बॉर्डर कनेक्टिविटी में सुधार होने और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को आसान बनाने, इस इलाके में इकोनॉमिक और स्ट्रेटेजिक लिंकेज को मजबूत करने की उम्मीद है।
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