सांकेतिक तस्वीर।
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। अमावस्या पर 64 वर्षों में दुर्लभ संयोग के साथ सूर्य ग्रहण पड़ेगा। इसकी अवधि चार घंटे 32 मिनट की रहेगी। सूर्य देव वलयाकार रिंग ऑफ फायर की तरह नजर आएंगे।
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा ने बताया कि शनि की राशि कुंभ में ये ग्रहण 17 फरवरी को लगेगा। ज्योतिष के हिसाब से ये ग्रहण बेहद खास है, क्योंकि इस दौरान सूर्य कुंभ राशि में राहु के साथ युति में रहेगा। दोपहर तीन बजकर 26 मिनट से शुरू होकर शाम सात बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण लगभग चार घंटे 32 मिनट की अवधि का होगा।
64 साल बाद ऐसा योग बन रहा है
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि दुर्गा सप्तशती के अनुसार जब अमावस्या मंगलवार को हो और चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में, तब ये संयोग कला, लेखन, साधना और अध्यात्म के लिए काफी शुभ माना जाता है। 64 साल बाद ऐसा योग बन रहा है। आखिरी बार 1962 में हुआ था। इस बार भी सूर्य और राहु कुंभ में, और चंद्रमा शतभिषा नक्षत्र में रहेगा। ये योग असर को और गहरा बना देता है। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में दिखाई देगा।
दुनियाभर के विभिन्न देशों में लोग आसमान में सूर्य को रिंग ऑफ फायर की तरह देख सकेंगे
सूर्य ग्रहण का चरम शाम 5:42 बजे पर होगा। इस दौरान दुनियाभर के विभिन्न देशों में लोग आसमान में सूर्य को रिंग ऑफ फायर की तरह देख सकेंगे। दो मिनट 20 सेकेंड तक पीक पर रहने के बाद ग्रहण कम होना शुरू हो जाएगा। यह सूर्य ग्रहण रात्रि 07:57 बजे पर खत्म हो जाएगा। भारत में ये दिखाई नहीं देगा तो सूतक काल मान्य नहीं है। |