बॉलीवुड एक्ट्रेस को मिले खूब रिजेक्शन। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। कुछ कलाकारों को फिल्मी वर्ल्ड से ज्यादा टेलीविजन ने पहचान दिलाई। एक ऐसी ही एक अदाकारा 80 के दशक में आईं जिन्होंने कल्ट क्लासिक से खुद को साबित किया। मगर उन्हें खास फिल्में नहीं मिलीं। टीवी ने उनका करियर संवारा।
यह अदाकारा आज थिएटर और टीवी शोज के लिए जानी जाती हैं। 2000 के दशक में भी उन्होंने कई फिल्मों में सपोर्टिंग रोल्स के जरिए दर्शकों का दिल जीता। यह अदाकारा हैं रत्ना पाठक (Ratna Pathak)।
पहली फिल्म रही थी कल्ट
रत्ना पाठक शाह ने 80 के दशक में अपना एक्टिंग डेब्यू किया था। उनकी पहली फिल्म मंडी थी। श्याम बेनेगल की फिल्म मंडी में मालती देवी की भूमिका में उन्हें पसंद किया गया और तारीफ मिली, बस फिल्में नहीं मिलीं। एक्टिंग में आने से पहले ही उन्होंने नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) से शादी कर ली थी।
फिल्में न मिलने पर हो गई थीं परेशान
जब रत्ना पाठक अपना करियर बना रही थीं, उस वक्त नसीरुद्दीन शाह इंडस्ट्री में अपने पैर जमा चुके थे। वे नेशनल अवॉर्ड भी जीत चुके थे। पति को एक के बाद एक फिल्में मिल रही थीं और दूसरी ओर रत्ना रिजेक्शन का सामना कर रही थीं। पिंकविला को दिए इंटरव्यू में रत्ना ने कहा, “काफी बुरा लगता था मुझे।“
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टीवी शोज ने डूबती नैय्या बचाई
रत्ना पाठक शाह ने बताया कि फिल्मों में भले ही उन्हें खास अवसर न मिले हों, लेकिन टीवी ने उनका करियर बचा लिया। बकौल एक्ट्रेस, “टीवी ने तो मेरी जान बचा दी।“ रत्ना को सबसे ज्यादा कामयाबी 2004 में आए टीवी शो \“साराभाई वर्सेस साराभाई\“ से मिली। इसने उनका करियर चमका दिया।
Ratna Pathak Shah in Sarabhai vs Sarabhai with Rupali Ganguly- IMDb
2000 के दशक में कीं ये फिल्में
80s में भले ही रत्ना पाठक शाह को खास फिल्में न मिली हों, लेकिन \“साराभाई वर्सेस साराभाई\“ के बाद उन्होंने \“यूं होता तो क्या होता\“, \“जाने तू या जाने ना\“, \“अलादीन\“, \“गोलमाल 3\“, \“एक मैं और एक तू\“ और \“खूबसूरत\“ जैसी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्मों में काम किया।
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