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मुक्तसर में बड़ा हड़ताल, रोडवेज बसें बंद; मिड डे मील स्कूलों में बच्चों के लिए नहीं बनेगा खाना

deltin33 1 hour(s) ago views 72
  

मुक्तसर में अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल, सरकारी बसें ठप और स्कूलों में मिड डे मील नहीं



जागरण संवाददाता, श्री मुक्तसर साहिब। जिले में विभिन्न विभागों में कार्यरत अस्थायी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर आज हड़ताल पर हैं। अलग-अलग यूनियनों से जुड़े कर्मचारी बस स्टैंड पर इकट्ठे होकर रोष प्रदर्शन करेंगे। पंजाब रोडवेज पनबस पीआरटीसी कांट्रैक्ट ट्रैक्ट वर्कर यूनियन के चक्का जाम करने के चलते आज पूरा दिन सरकारी बसें बंद रहेंगी।

वहीं, मिड डे मील कर्मचारियों के हड़ताल कआ समर्थन करने के चलते स्कूलों में बच्चों के लिए खाना भी नहीं बनेगा। ट्रेड यूनियन, संयुक्त किसान मोर्चा और सीपीआईएम ने भी हड़ताल का समर्थन किया है।

उधर, पूरा दिन सरकारी बसें नहीं चलने के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। खासकर महिलाओं के लिए काफी समस्या पैदा हो रही है। उल्लेखनीय है कि यूनियन ने लंबे रूट पर चलने वाली बसों को बुधवार बाद दोपहर ही वापस डिपो में मंगवा लिया था। मुक्तसर , मलोट में नगर कौंसिल के कर्मचारी भी हड़ताल के समर्थन में हैं।

पंजाब रोडवेज पनबस/ पीआरटीसी कंट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब के डिपो अध्यक्ष जगसीर सिंह माणक ने कहा कि पंजाब सरकार ने युवाओं को रोजगार नहीं दिया, उलट पिछले करीब 20 सालों से कांट्रैक्ट आउटसोर्स पर काम कर रहे कर्मचारियों को नई दिक्कत में फंसा दिया है।

जिसे स्पेशल कैडर पालिसी 2023 कहकर फंसाया जा रहा है। आम आदमी पार्टी की सरकार पूरे पंजाब के अस्थायी कर्मचारियों को पक्का करने, ट्रांसपोर्ट विभाग को चलाने समेत किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों की मांगों का हल करने में फेल साबित हो चुकी है और अपनी नाकामी को छुपाने के लिए पुलिस प्रशासन का उपयोग कर लोगों की आवाज दबाने में लगी हुई है।

मिड डे मील वर्कर्स यूनियन पंजाब जिला इकाई मुक्तसर के महासचिव राजविंदर कौर ने बताया कि सरकारी स्कूलों में काम कर रहे मिड डे मील वर्कर्स का सरकार सिर्फ 3000 रुपये का मान भत्ता दे रही है, जो आर्थिक शोषण है। मिड डे मील वर्कर्स और अन्य मान भत्ता वर्कर्स पर न्यूनतम मजदूरी कानून लागू नहीं किया जा रहा।

12 फरवरी को स्कूलों में खाना बनाने के काम का बहिष्कार कर बस स्टैंड पर संयुक्त रैली और अन्य ब्लाक स्तर की साझी रैलियों में शामिल हो रहे हैं। मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी फैसलों के खिलाफ भारत की ट्रेड यूनियनें भी पूर्ण हड़ताल पर रहेंगी, जिसे सफल बनाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा समर्थन कर रहा है।
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