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छोटे अस्पतालों को बड़े नियमों के दायरे से छूट मिले, दवाइयों के दाम कम हो

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कोडरमा, वरीय संवाददाता केंद्र सरकार एक फरवरी को देश का आम बजट पेश करने जा रही है। बजट को लेकर देश के हर वर्ग की तरह शहर के डॉक्टरों में भी खासा उत्साह और उम्मीदें देखी जा रही हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाती है, तो इसका सीधा लाभ आम जनता के साथ-साथ चिकित्सा सेवाएं देने वाले डॉक्टरों को भी मिलेगा। शहर के चिकित्सक डॉ प्रवीण कुमार, डॉ नरेश पंडित और डॉ सुजीत राज का मानना है कि वर्तमान समय में छोटे और मध्यम अस्पतालों को कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है।





खासकर 50 बेड से कम वाले निजी अस्पतालों को क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि इस कानून के तहत छोटे अस्पतालों पर वही नियम लागू कर दिए जाते हैं, जो बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों पर होते हैं, जिससे छोटे अस्पतालों के संचालन में कठिनाई आती है। यदि बजट के माध्यम से इस विषय पर कोई स्पष्ट नीति बनाई जाती है, तो इससे छोटे अस्पतालों को राहत मिलेगी और वे बेहतर ढंग से मरीजों की सेवा कर सकेंगे। इसके साथ ही डॉक्टरों ने दवाइयों की बढ़ती कीमतों पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि महंगी दवाइयों के कारण मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कई बार मरीज इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। डॉक्टरों की मांग है कि केंद्र सरकार बजट में दवाइयों के दाम नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाए, आवश्यक दवाइयों पर टैक्स में छूट दे और जेनेरिक दवाओं को और अधिक प्रोत्साहित करे। इससे आम लोगों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। शहर के डॉक्टरों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी बजट से बड़ी उम्मीद जताई है। डॉक्टरों का कहना है कि आए दिन देश के विभिन्न हिस्सों में डॉक्टरों के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार और धमकी जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। आपात स्थिति में काम करने वाले डॉक्टरों पर कई बार मरीजों के परिजन अपना गुस्सा निकालते हैं, जिससे डॉक्टरों का मनोबल टूटता है। डॉक्टरों ने मांग की है कि बजट में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने और अस्पताल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का प्रावधान किया जाए। डॉक्टरों का यह भी कहना है कि यदि सरकार स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी करती है, तो इससे सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। नए उपकरण, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध हो सकेगा, जिसका लाभ अंततः मरीजों को मिलेगा। कुल मिलाकर शहर के डॉक्टरों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार का यह आम बजट स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए राहत भरा साबित होगा और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए ठोस फैसले लिए जाएंगे। क्या कहते हैं शहर के डॉक्टर दवाइयों के दाम कम हो, डॉक्टरों को मिले सुरक्षा: डॉ प्रवीण कुमार कोडरमा के झुमरीतिलैया के सर्जन डॉ प्रवीण कुमार कहते हैं कि सरकार से अनुरोध होगा कि दवाइयों के दाम कम किए जाएं। इसका फायदा सीधे तौर पर मरीजों और उनके परिजनों को मिलेगा। वर्तमान समय में छोटे और मध्यम अस्पतालों को कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। इससे आए दिन डॉक्टरों को कई तरह की परेशानी हो रही है। इसके अलावा महंगी दवाइयों के कारण मरीजों और उनके परिजनों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कई बार मरीज इलाज अधूरा छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इन छोटी-छोटी बातों का बजट में ध्यान रखने का अनुरोध होगा। डॉ प्रवीण कुमार, झुमरीतिलैया, कोडरमा क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के दायरे से छोटे अस्पतालों को बाहर रखा जाए: डॉ नरेश पंडित जिले के झुमरीतिलैया के चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर नरेश पंडित कहते हैं कि कोडरमा में 50 बेड से कम वाले कई निजी अस्पताल हैं। ऐसे में इनको क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। इस कानून के तहत छोटे अस्पतालों पर वही नियम लागू कर दिए जाते हैं, जो बड़े कॉरपोरेट अस्पतालों पर होते हैं, जिससे छोटे अस्पतालों के संचालन में कठिनाई आती है। यदि बजट के माध्यम से इस विषय पर कोई स्पष्ट नीति बनाई जाती है, तो इससे छोटे अस्पतालों को राहत मिलेगी और वे बेहतर ढंग से मरीजों की सेवा कर सकेंगे। साथ ही डॉक्टरों की सुरक्षा का भी प्रावधान लाया जाए। डॉ नरेश पंडित, झुमरीतिलैया, कोडरमा डॉक्टरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखने का अनुरोध होगा: डॉ सुजीत राज कोडरमा के झुमरीतिलैया के सर्जन डॉ सुजीत राज का कहना है कि इस बजट में सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखने का अनुरोध होगा। आए दिन डॉक्टरों के साथ मारपीट, अभद्र व्यवहार और धमकी जैसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। डॉक्टरों ने मांग की है कि बजट में डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाने और अस्पताल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का प्रावधान किया जाए। आपात स्थिति में काम करने वाले डॉक्टरों पर कई बार मरीजों के परिजन अपना गुस्सा निकालते हैं, जिससे डॉक्टरों का मनोबल टूटता है। कोडरमा छोटा जिला है। यहां क्लीनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट का औचित्य नहीं है। डॉ सुजीत राज, झुमरीतिलैया, कोडरमा
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