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Magh Purnima 2026: श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिए पूजा थाली में शामिल करें ये चीजें, यहां देखें सामग्री लिस्ट

deltin33 7 hour(s) ago views 268
  

Magh Purnima 2026: इन चीजों के बिना अधूरी है माघ पूर्णिमा की पूजा (Image Source: AI-Generated)



धर्म डेस्क, नई दिल्ली। माघ माह की पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा या माघी पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार यह पर्व 1 फरवरी (Magh Purnima 2026 Date) को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ पूर्णिमा के अवसर पर देवता स्वर्ग से धरती पर आकर संगम में स्नान करते हैं। इसलिए माघ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करने का विधान है और पूजा थाली में विशेष चीजों को शामिल करना चाहिए, जिससे साधक को पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
माघ पूर्णिमा 2026 डेट और शुभ मुहूर्त (Magh Purnima 2026 Date and Shubh Muhurat)

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 01 फरवरी को सुबह 05 बजकर 52 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 02 फरवरी को देर रात 03 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में माघ पूर्णिमा 01 फरवरी (Kab Hai Magh Purnima 2026) को मनई जाएगी।
शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त- 05 बजकर 24 मिनट से 06 बजकर 17 मिनट पर
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 57 मिनट पर
गोधूलि मुहूर्त- शाम 05 बजकर 58 मिनट से 06 बजकर 24 मिनट पर
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 23 मिनट से 03 बजकर 07 मिनट पर

  
माघ पूर्णिमा पूजा सामग्री लिस्ट (Magh Purnima Puja Samagri List)

  • घी
  • पंचामृत
  • रोली
  • अक्षत
  • सिंदूर
  • दीपक
  • चंदन
  • बत्ती
  • मिठाई
  • गंगाजल
  • कमल और पीले फूलों की माला
  • लाल कपड़ा
  • भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की प्रतिमा

जरूर करें ये काम

  • सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की साधना करें।
  • सत्यनारायण भगवान की कथा का पाठ करें।
  • देसी घी का दीपक जलाएं।
  • पूजा में फल, पंचामृत और तुलसी के पत्ते जरूर शामिल करें।
  • इसके अलावा माघ पूर्णिमा के दिन तिल, गुड़, वस्त्र और अन्न समेत आदि चीजों का दान करना चाहिए। इससे धन लाभ के योग बनते हैं। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

विष्णु मंत्र

1. ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।

यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्”।।

2. वृंदा,वृन्दावनी,विश्वपुजिता,विश्वपावनी |

पुष्पसारा,नंदिनी च तुलसी,कृष्णजीवनी ।।

एत नाम अष्टकं चैव स्त्रोत्र नामार्थ संयुतम |

य:पठेत तां सम्पूज्य सोभवमेघ फलं लभेत।।

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अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। दैनिक जागरण तथा जागरण न्यू मीडिया अंधविश्वास के खिलाफ है।
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