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दूध से कमाई होगी दोगुनी, शिवहर में अब हर गांव में डेयरी उद्योग की स्थापना

LHC0088 2026-1-24 14:28:19 views 867
  

यह तस्वीर एआई की मदद से तैयार की गई है।  



नीरज, शिवहर। sheohar dairy industry :शिवहर जिले के 207 गांवों में अब गांव स्तर पर डेयरी उद्योग की स्थापना होगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों की आय दोगुना करना और रोजगार के अवसर पैदा करना है।

इसके तहत प्रत्येक गांव में दूध उत्पादन के साथ-साथ पनीर, मक्खन, खोया और मिठाई का निर्माण कराया जाएगा। जिला प्रशासन इस योजना के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा और उत्पादित डेयरी उत्पादों को पंचायतों के माध्यम से बाजार में उपलब्ध कराया जाएगा।

जिले में वर्तमान में रोजाना लगभग 50 हजार लीटर दूध का संग्रहण होता है। तिमुल संगठन रोजाना 10 हजार लीटर दूध संग्रहित करता है, वहीं अन्य समितियां भी लगभग 10 हजार लीटर दूध का संग्रह करती हैं। इसके अलावा मिठाई दुकानों में रोजाना 20 हजार लीटर दूध की खपत होती है।

शिवहर में डेयरी उद्योग के स्थापना से जिले की सभी 53 पंचायतों के 207 गांवों के एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। जिले में पशुपालन के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। करीब 65 हजार लोग गाय-भैस आदि दुधारू पशु पालन से जुड़े हैं, जिसमें तीन हजार महिलाएं भी शामिल हैं।

राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार, जिले में दूध उत्पादन समितियों का गठन किया जाएगा और सरकार अनुदानित दर पर लोन भी उपलब्ध कराएगी। सभी पंचायतों में सुधा डेयरी काउंटर भी खोला जाएगा, ताकि किसानों का दूध उचित मूल्य पर बेचा जा सके।

स्थानीय पशुपालक अशोक राय का कहना है कि अब दूध की मांग और उत्पादन बढ़ा है, लेकिन पहले किसानों को पर्याप्त लाभ नहीं मिलता था। गांव स्तर पर डेयरी उद्योग की स्थापना से उन्हें उचित मूल्य और आय में वृद्धि मिलेगी।

पिपराही के किसान रामेश्वर प्रसाद का कहना है कि यह योजना किसानों के लिए क्रांतिकारी साबित होगी, जिससे उनकी समृद्धि बढ़ेगी और रोजगार के अवसर सृजित होंगे।  
डेयरी उद्योग, मुनाफे का गणित

बिहार में डेयरी उद्योग एक बेहद मुनाफे वाला व्यवसाय है, खासकर सुधा (COMFED) के मजबूत नेटवर्क के कारण। 2026 के ताजा आंकड़ों और सरकारी योजनाओं (जैसे \“समग्र गव्य विकास योजना\“) के आधार पर इसका पूरा गणित कुछ इस प्रकार है:  
न्यूनतम लागत (2-पशु इकाई के लिए)

मद (Item)

अनुमानित लागत (₹)

विवरण

पशु की खरीद

1,20,000 – 1,60,000

2 उन्नत नस्ल की गाय/भैंस (लगभग ₹70,000/पशु)

शेड निर्माण

30,000 – 50,000

कच्चा/पक्का शेड और बर्तन

बीमा एवं अन्य

10,000 – 15,000

पशु बीमा और शुरुआती दवाइयाँ

कुल लागत

1,60,000 – 2,25,000

सरकारी सब्सिडी के बिना

सरकारी सब्सिडी का लाभ:

  • SC/ST/EBC: 75% सब्सिडी (केवल 25% निवेश)
  • सामान्य/OBC: 50% सब्सिडी

मासिक आय और मुनाफा

  • दूध उत्पादन: 2 गायों से 20–25 लीटर/दिन
  • बिक्री दर: ₹45–₹55 प्रति लीटर (सुधा या स्थानीय बाजार)
  • मासिक कुल आय: 25 लीटर × ₹50 × 30 दिन = ₹37,500

शुद्ध मुनाफा (Net Profit):

  • खर्चा: ₹20,000 (हरा चारा, भूसा, दाना, दवा, बिजली/लेबर)
  • बचत: ₹15,000–17,000 प्रति माह (2 पशुओं पर)

ध्यान रखने योग्य बातें

  • नस्ल का चुनाव: साहीवाल, गिर या क्रॉस ब्रीड (HF/Jersey) गायें और मुर्रा भैंस सबसे उपयुक्त
  • मार्केटिंग: नजदीकी दुग्ध सहकारी समिति (सुधा) से जुड़ें – पेमेंट सीधे बैंक खाते में
  • उप-उत्पाद: गोबर से वर्मीकम्पोस्ट बनाकर 10–15% अतिरिक्त आय
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