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नामांकन पत्रों की जांच का काम सहायक निर्वाची पदाधिकारियों (एआरओ) द्वारा नहीं किया जाएगा।
नीरज अम्बष्ठ, रांची । राज्य में होनेवाले निकाय चुनाव के दौरान उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए जानेवाले नामांकन पत्रों की जांच सिर्फ निर्वाची पदाधिकारी (आरओ) करेंगे। नामांकन पत्रों की जांच का काम सहायक निर्वाची पदाधिकारियों (एआरओ) द्वारा नहीं किया जाएगा।
राज्य निर्वाचन आयोग ने इसे लेकर निर्वाची पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। हालांकि उम्मीदवारों द्वारा नामांकन पत्र सहायक निर्वाची पदाधिकारी के समक्ष भी प्रस्तुत किया जा सकेगा।
आयोग के अनुसार, उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों की जांच एक अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया है। इसलिए यह काम सिर्फ निर्वाची पदाधिकारी द्वारा किया जाएगा। नामांकन पत्रों की जांच में किसी वरीय पदाधिकारी या प्रेक्षक से मार्गदर्शन प्राप्त नहीं करना है।
निर्णय निर्वाची पदाधिकारी को ही करना है। आयोग के अनुसार, नामांकन पत्रों की जांच के समय उम्मीदवार, उनके प्रस्तावक, निर्वाचन अभिकर्ता एवं एक अन्य प्राधिकृत व्यक्ति या अधिवक्ता हो सकते हैं।
इस समय उम्मीदवार की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होगी। निर्वाची पदाधिकारी द्वारा निर्धारित तिथि तथा अवधि में उम्मीदवारों द्वारा दाखिल सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी।
निर्वाची पदाधिकारियों से कहा गया है कि उम्मीदवार द्वारा प्रस्तुत किए जाने के समय ही नामांकन पत्रों की प्रारंभिक जांच कर ली जाए, जैसे उम्मीदवार तथा उनके प्रस्तावक का नाम मतदाता सूची में है या नहीं तथा नामांकन पत्र के साथ आवश्यक कागजात संलग्न किया गया है या नहीं।
इसलिए निर्वाची पदाधिकारी के पास पूरे नगरपालिका के सभी वार्डों की मतदाता सूची होनी चाहिए, क्योंकि नगरपालिका के मतदाता सूची में
दर्ज कोई व्यक्ति किसी भी वार्ड से उम्मीदवार हो सकता है।
आयोग ने नामांकन पत्रों के दाखिल करने से संबंधित सभी प्रक्रियाएं पूर्व में जारी दिशा-निर्देश के अनुसार ही पूरा करने को कहा है। यह सुनिश्चित करने को कहा है कि नामांकन पत्र दाखिल करते समय अधिकतम तीन वाहनों एवं पांच व्यक्ति का ही प्रवेश हो।
किसी उम्मीदवार के नामांकन के समय निर्वाची पदाधिकारी कार्यालय की 100 मीटर की परिधि में महज तीन वाहनों का ही प्रवेश होगा। वहीं, नामांकन के समय अधिकतम पांच व्यक्ति का ही इस परिधि में प्रवेश हो सकेगा।
तकनीकी व लिपिकीय त्रुटि के आधार पर रद नहीं होगा नामांकन
निर्वाची पदाधिकारियों को यह भी सुझाव दिया गया है कि तकनीकी व लिपिकीय त्रूटि को नामांकन पत्रों जांच के समय नजरअंदाज किया जाए। उसके आधार पर किसी उम्मीदवार का नामांकन रद न किया जाए।
साथ ही किसी उम्मीदवार के नामांकन रद किए जाने का पर्याप्त आधार होना चाहिए। इससे संबंधित आयोग के दिशा-निर्देश का सख्ती से अनुपालन हो। |
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