भारत सरकार ने शुक्रवार को आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए दिए जाने वाले सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार का ऐलान किया। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ये पुरस्कार हर साल नेता जी सुभाष चंद्र बोस जयंती पर दी जाती है। इस बार ये पुरस्कार, लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के और सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) को उनके अमूल्य योगदान के लिए ये सम्मान दिया गया है।
लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के
बता दें कि, लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के को सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार व्यक्तिगत श्रेणी में चुना गया है। बता दें कि, लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के भारतीय सेना की इंजीनियरिंग सेवा में रहते हुए आपदा जोखिम को कम करने का अहम काम कर रही हैं। वह कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करके दूर-दराज और आपदा-प्रभावित इलाकों में तेजी से पुल, पहुंच मार्ग और अस्थायी आश्रय बनवाती हैं। इससे राहत और बचाव कार्य समय पर और बेहतर तरीके से हो पाते हैं। उनका काम दिखाता है कि ज़मीनी स्तर पर मजबूत नेतृत्व और ऑपरेशनल आपदा प्रबंधन में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
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लेफ्टिनेंट कर्नल सीता अशोक शेल्के ने ऑपरेशन मदद 2024 के दौरान अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग और नेतृत्व क्षमता का शानदार उदाहरण पेश किया। 2024 में भूस्खलन के बाद वायनाड के चूरलमाला इलाके में उन्होंने 190 फीट लंबे बेली ब्रिज और 100 फीट के फुटब्रिज के तेजी से निर्माण का नेतृत्व किया। उन्होंने चूरलमाला में 190 फीट के बेली ब्रिज का काम खुद निगरानी में पूरा कराया, ताकि बाढ़ से टूटी सड़क कनेक्टिविटी 72 घंटे के भीतर दोबारा बहाल हो सके। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के अनुसार, बेहद कठिन हालात में रिकॉर्ड समय में यह काम पूरा कर उनकी टीम ने जरूरी संपर्क बहाल किया, कई जानें बचाईं और राहत कार्यों को आसान बनाया।
इसके अलावा, लेफ्टिनेंट कर्नल शेल्के ने 2024 में वायनाड जिले में बाढ़ से प्रभावित 10,000 से ज्यादा लोगों के लिए बड़े स्तर पर राहत और इंजीनियरिंग कार्यों का भी नेतृत्व किया।
सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण
सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA)को ये पुरस्कार संस्थागत श्रेणी में चुना गया। बता दें कि, सिक्किम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SSDMA) की स्थापना साल 2005 में की गई थी। इसके बाद से सिक्किम में आपदा से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया व्यवस्था काफी मजबूत हुई है। SSDMA के तहत 1,185 प्रशिक्षित आपदा मित्र तैयार किए गए हैं, जिन्हें तीन स्तरों पर तैनात किया गया है—
- गांव स्तर पर आपदा मैनेजमेंट सुपरवाइजर
- ब्लॉक मुख्यालय में डिजास्टर मैनेजमेंट सुपरवाइजर
- जिला मुख्यालय में डिजास्टर मैनेजमेंट कोऑर्डिनेटर
राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आपदा प्रबंधन सहायकों की तैनाती की गई है। इससे गांवों में भागीदारी के साथ योजना बनाना, प्रशिक्षण देना और पंचायत स्तर की समितियां बनाना संभव हुआ है। इन प्रयासों से राज्य के सभी छह जिलों में आपदाओं और जलवायु जोखिमों से निपटने की क्षमता बढ़ी है। 2016 के मंतम भूस्खलन और तीस्ता नदी में 2023 की बाढ़ जैसी बड़ी आपदाओं के दौरान SSDMA की रियल-टाइम निगरानी और प्रशिक्षित फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स ने 2,563 लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। इन प्रयासों से जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सका।
SSDMA ने आपदा मित्र कार्यक्रम के जरिए एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जो समुदाय को केंद्र में रखकर काम करता है। इसमें समय से चेतावनी, पहले से तैयारी और स्थानीय स्तर पर लोगों को सक्षम बनाने पर जोर दिया गया है। यह मॉडल टिकाऊ, बड़े स्तर पर लागू करने योग्य और दूसरे राज्यों में दोहराया जा सकने वाला है, खासकर हिमालयी और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए। |
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