Budget 2026: MSME और गांवों के लिए सस्ते लोन का रास्ता साफ? NBFC को मिल सकती है बड़ी सौगात; क्या होगा खास
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली| पिछले एक वर्ष में कई तरह के सुधार करने के बाद सरकार का पूरा ध्यान ग्रामीण मांग को बढ़ाने पर है ताकि देश की आर्थिक विकास दर की रफ्तार को आगे भी बनाये रखा जाए। इस क्रम में 2026-27 के आम बजट (Budget 2026) में गैर-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) के लिए सकारात्मक घोषणाओं की तैयारी है। फोकस मुख्य रूप से एमएसएमई और कम आय वाले उधारकर्ताओं को किफायती दरों पर कर्ज उपलब्ध कराने पर होगी। साथ ही दूर दराज के इलाकों में स्थित लुघ, छोटे व मझोले उद्यमियों को आसानी से कर्ज दिलाने के लिए भी कदम उठाया जाएगा।
RBI और वित्त मंत्रालय ने की घोषणा
ये घोषणाओं हाल ही में आरबीआई (RBI) और वित्त मंत्रालय के बीच हुई एक विशेष समीक्षा बैठक में मिले सुझावों के आधार पर होगा। माना जा रहा है कि उक्त उद्देश्य से एनबीएफसी (NBFCs) को फंड उपलब्ध कराने के लिए विशेष पुर्नवित्त कोष की स्थापना, मुद्रा योजना को विस्तार देना और ऋण योजनाओं को सरल बनाना सरकार के एजेंडे में है। सरकार की तरफ से उक्त कदम तब उठाया जा रहा है कि जब देश की इकोनमी में एनबीएफसी की अहमियत को नये सिरे से रेखांकित किया गया है।
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NBFC में कई समस्याएं, RBI ने किया दूर
कुछ वर्ष पहले एनबीएफसी को लेकर कई समस्याएं पैदा हुई थी जिसे आरबीआई (RBI) ने लगातार निगरानी तंत्र को बेहतर करके दूर कर दिया है। अब आरबीआई की तरफ से भी एनबीएफसी को पूरा बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले आम बजट में भी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण में एनबीएफसी के लिए कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं की थी।
एनबीएफसी के लोग बता रहे हैं कि उसका सकारात्मक असर पूरी तरह से दिखाई दे रहा है। आज की तारीख में खुदरा ऋण में एनबीएफसी की हिस्सेदारी बढ़ कर 58 फीसद हो गई है। खास तौर पर दूसरे व तीसरे टायर के शहरों में एनबीएफसी की तरफ से वितरित कर्ज की दफ्तार वाणिज्यिक बैंकों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
बजट 2026 से क्या हैं उम्मीदें? (budget expectations 2026)
डीजेटी माइक्रोफाइनेंस के सीओओ अविनाश कुमार का कहना है कि, “हम 2026 के यूनियन बजट में उम्मीद (Budget Expectations 2026) करते हैं कि एमएसएमई और कम आय वाले लोगों को सस्ता और आसान कर्ज मिल सके, साथ ही डिजिटल शिक्षा के लिए ज्यादा मदद दी जाए।ग्रामीण इलाकों में मांग बनी रहे और सस्ता पैसा अलग-अलग जगहों पर पहुंचे, इसके लिए माइक्रोफाइनेंस संस्थाएं बहुत अहम हैं।
बढ़ने के लिए फंडिंग में कम मुश्किलें होनी चाहिए और रुकावटें हटनी चाहिए। हम एनबीएफसी के लिए पैसों की लागत कम होने की उम्मीद करते हैं, जो खास रिफाइनेंस खिड़कियों से हो सकती है।मुद्रा योजना को और बड़ा करना तथा कर्ज की स्कीम्स को आसान बनाना जरूरी है, ताकि बैलेंस शीट पर बोझ कम हो और ज्यादा लोगों तक पहुंच बढ़े।\“\“ |
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