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Budget 2026 : इस बजट से क्या हैं बड़ी उम्मीदें, किन 5 सेक्टर्स पर रहेगा फोकस?

deltin55 1 hour(s) ago views 19

Budget 2026 Expectations : 5 Key Sectors in Focus : बजट 2026 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है. आम लोगों से लेकर इंडस्ट्री तक, सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार इस बजट में ग्रोथ और खर्च में संतुलन कैसे बनाएगी. पिछले कुछ अरसे में जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद भारत की इकोनॉमी जिस तरह मजबूत बनी रही है, उससे बजट को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं.




शेयर बाजार और कॉरपोरेट वर्ल्ड सिर्फ कंजम्पशन बढ़ाने वाले कदमों पर ही नहीं, बल्कि उन सेक्टर्स पर भी नजर रखे हुए हैं जो लंबे समय में भारत की ग्रोथ स्टोरी को और मजबूत कर सकते हैं. डिफेंस, क्लीन एनर्जी, टेक्नोलॉजी, पावर और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे सेक्टर्स इस बार बजट के फोकस में रह सकते हैं.







बजट 2025 में सरकार ने डिफेंस के लिए करीब 4,91,732 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा एलोकेशन किया था. आईटी और टेलीकॉम सेक्टर को 81,174 करोड़ रुपये मिले थे, जबकि एनर्जी सेक्टर के हिस्से में 65,553 करोड़ रुपये आए थे. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने तब साफ कहा था कि पावर, माइनिंग और फाइनेंशियल सेक्टर भारत को ग्लोबल लेवल पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएंगे.



अब Budget 2026 से पहले कंसल्टेंसी फर्म डेलॉयट (Deloitte) ने कुछ अहम सुझाव दिए हैं, जिनका मकसद टैक्स सिस्टम को आसान बनाना, नियमों के बोझ को कम करना और प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देना है. खासतौर पर ऐसे सेक्टर्स में, जहां भारी पूंजी निवेश की जरूरत पड़ती है और प्रोजेक्ट्स पूरा करने में लंबा समय लगता है.









रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में कंपनियां लंबे समय से टैक्स स्ट्रक्चर को लेकर राहत की मांग कर रही हैं. डेलॉयट का सुझाव है कि सरकार रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों के लिए ग्रुप टैक्स कंसोलिडेशन सिस्टम लागू करे.



असल में, इस सेक्टर में एक ही ग्रुप के तहत कई छोटी-छोटी कंपनियां या SPV बनाई जाती हैं, जिससे टैक्स और कैश फ्लो में दिक्कत आती है. लेकिन अगर पूरे ग्रुप को एक टैक्स यूनिट मान लिया जाए, तो एक कंपनी का घाटा दूसरी कंपनी के मुनाफे से एडजस्ट किया जा सकता है. इससे कई दिक्कतें दूर होंगी और टैक्स कंप्लायंस भी आसान बनेगा.




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भारत में क्लीन एनर्जी और एनर्जी सिक्योरिटी की दिशा में न्यूक्लियर पावर को एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है. लेकिन इस सेक्टर में निवेश महंगा है और रिटर्न आने में वक्त लगता है.



डेलॉयट का मानना है कि न्यूक्लियर स्टार्टअप्स और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को डायरेक्ट टैक्स इंसेंटिव मिलना चाहिए. इसमें तेज डिप्रिसिएशन, रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर टैक्स क्रेडिट और सेक्शन 80-IAC का लाभ शामिल है.




बजट 2025 में सरकार ने 2047 तक 100 GW न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी तैयार करने का लक्ष्य रखा था. इसके लिए स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर यानी SMR पर करीब 20,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा भी की गई थी. बजट 2026 में इस दिशा में ठोस कदम देखने को मिल सकते हैं.




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रिन्यूएबल एनर्जी के साथ सबसे बड़ी चुनौती स्टोरेज की है. बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (Battery Energy Storage System) यानी BESS को बढ़ावा देने के लिए टैक्स और GST में राहत की उम्मीद की जा रही है.




डेलॉयट ने सुझाव दिया है कि BESS प्रोजेक्ट्स को सेक्शन 35AD के तहत पूरे कैपिटल एक्सपेंडिचर डिडक्शन का लाभ मिले. इसके अलावा शेयरहोल्डिंग में बदलाव के कारण घाटे को आगे ले जाने की सुविधा भी सुरक्षित रखी जाए.




GST के मोर्चे पर अभी लीथियम आयन बैटरीज़ पर 18 प्रतिशत टैक्स लगता है. इंडस्ट्री चाहती है कि इसे घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए, ताकि प्रोजेक्ट की लागत कम हो और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से तैयार हो सके.



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पिछले बजट में मेक इन इंडिया (Make in India) को आगे बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी को खास तवज्जो दी गई थी. प्राइवेट सेक्टर की अगुवाई में रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था.




इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और एडवांस टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स के लिए डीप टेक फंड ऑफ फंड्स (Deep Tech Fund of Funds) की घोषणा भी हुई थी. AI एजुकेशन के लिए 500 करोड़ रुपये के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने भी इस सेक्टर को मजबूती दी है. बजट 2026 में इन योजनाओं को और विस्तार मिलने की उम्मीद है.



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पावर सेक्टर में राज्यों को पावर डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स के बदले अतिरिक्त लोन की छूट दी गई थी. अब सवाल है कि क्या बजट 2026 में और इंसेंटिव्स की घोषणा होगी.




वहीं, क्रिटिकल मिनरल्स भी इस बार अहम एजेंडा हो सकते हैं. चीन की तरफ से लगाए गए एक्सपोर्ट कर्ब के बाद भारत को सप्लाई चेन से जुड़ी कमजोरी का एहसास हुआ. पिछले बजट में कई जरूरी मिनरल्स पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई थी. बजट 2026 में सरकार इस दिशा में और राहत दे सकती है, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ और मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती मिले.


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