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देहरी पूजा की घोषणा पर समिति अध्यक्ष व सचिव को दिया कानूनी नोटिस

cy520520 Yesterday 13:56 views 880
  



मंदिर उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति के अध्यक्ष व सचिव के नाम भेजा कानूनी नोटिस
कहा, जब हमें नहीं देहरी पूजन का अधिकार तो फिर खुद कैसे कर सकते हैं


जागरण, संवाददाता, मथुरा। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने जगमोहन के पास रेलिंग लगा दी है, इससे देहरी पूजन नहीं हो पा रहा है।

वसंत पंचमी पर एक श्रद्धालु द्वारा साढ़े दस किलो चांदी की देहरी अर्पित करने के साथ समिति के पदाधिकारियों द्वारा पूजन करने की घोषणा के बाद विवाद गहरा गया है।

सेवायतों का कहना है कि हमारा देहरी पूजन बंद है, तो फिर समिति कैसे करेगी। समिति को पूजन का अधिकार भी नहीं है। एक सेवायत के अधिवक्ता ने समिति के अध्यक्ष और सचिव को कानूनी नोटिस दिया है।  

उच्चाधिकार प्राप्त प्रबंधन समिति ने करीब एक माह पहले जगमोहन के पास रेलिंग लगवा दी। इससे श्रद्धालु जगमोहन के दोनों ओर चढ़ नहीं पाते, न ही देहरी पूजन हो पाता है। इसे लेकर सेवायत पहले से आक्रोशित है। एक श्रद्धालु साढ़े दस किलो चांदी की देहरी ठाकुर बांकेबिहारी को वसंत पंचमी पर शुक्रवार को अर्पित करेगा।

तीन दिन पूर्व समिति अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने मीडिया को इसकी जानकारी दी और कहा कि वसंत पंचमी पर पदाधिकारी भी साथ में पूजन कर देहरी अर्पित करेंगे। इसे लेकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत व मंदिर कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गौरव गोस्वामी के अधिवक्ता संकल्प गोस्वामी ने समिति अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति अशोक कुमार व सचिव डीएम सीपी सिंह को नोटिस भेजा है।

भेजे नोटिस में कहा है कि देहरी सेवा हरिदासी संप्रदाय की एक पारंपरिक और रीति-रिवाज वाली पूजा है, जिसे या तो संप्रदाय के सदस्य शिष्य करते हैं या वे गैर-सदस्य करते हैं जिन्हें हरिदासी संप्रदाय के दर्शन में विश्वास और श्रद्धा है और जिनमें गुरु के सख्त मार्गदर्शन में हरिदासी संप्रदाय में दीक्षा लेने की क्षमता है।

कमेटी के गैर-संप्रदाय सदस्यों, खासकर चेयरमैन ने सार्वजनिक रूप से यह कहकर हरिदासी संप्रदाय के दर्शन का मज़ाक उड़ाया कि देवता सोते नहीं हैं। ऐसा विश्वास हरिदासी संप्रदाय के इच्छा द्वैत और सखीभाव दर्शन के विपरीत है। इसे देखते हुए, कमेटी के गैर-संप्रदाय सदस्यों द्वारा देहरी सेवा करना मंदिर की परंपराओं के खिलाफ है।

कहा, जब समिति ने दूसरों के लिए देहरी सेवा पर रोक लगा दी है तो समिति सदस्य खुद देहरी सेवा नहीं कर सकते। समिति को मंदिर के प्रतिदिन के कामकाज का जिम्मा सौंपा गया है, लेकिन समिति को पारंपरिक रीति-रिवाज व पाबंदियों को नजरअंदाज करने का अधिकार नहीं है। उन्हें ऐसा काेई विशेषाधिकार भी नहीं जो दूसरों को उपलब्ध न हो।

अधिवक्ता ने दिए नोटिस में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते वर्ष आठ अगस्त को अपने आदेश में सेवा में दखलंदाजी से सुरक्षा दी है। जब संप्रदाय के शिष्यों को देहरी सेवा से वंचित किया जा रहा है तो कमेटी द्वारा देहरी सेवा देना कानूनी रूप से गलत है।

ऐसी परिस्थितियों में गैर सांप्रदायिक कमेटी के सदस्यों द्वारा देहरी पूजन करना न केवल संविधान के अनुच्छेद 14, 25 व 26 का उल्लंघन है बल्कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई प्रबंधन की शक्तियों का दुरुपयोग है।

आग्रह के बाद भी लगाई देहरी पूजन पर रोक: रजत


ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत रजत गोस्वामी कहते हैं कि पूर्व में बिना किसी लिखित आदेश के समिति ने देहरी पूजन पर रोक लगाई। सेवायतों ने समिति से मंदिर में आग्रह किया कि देहरी पूजन हमारी परंपरा है, इसे चालू रहने दिया जाए। लेकिन समिति ने रेलिंग लगाकर उसे पूरी तरह बंद कर दिया। फिर वह किस तरह कुद देहरी पूजन करना चाहते हैं।
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