स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाने की मांग की है।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। कोतवाली थानांतर्गत भंडारी स्टेशन निवासी पूर्व शासकीय अधिवक्ता फौजदारी हरीश चंद्र मौर्या का गला शुक्रवार को प्रतिबंधित मांझे से कट गया। यह घटना उस समय हुई जब वह सुबह करीब 10 बजे बाइक से दीवानी कचहरी जा रहे थे। उन्हें इस दुर्घटना में लगभग एक दर्जन टांके लगे हैं।
सद्भावना पुल से आगे बढ़ते ही मच्छरहट्टा के पास उनके गले में प्रतिबंधित मांझा फंस गया। जब तक वह कुछ समझ पाते, तब तक मांझे ने उनके गले की चमड़ी को गहरे निशान के साथ काट दिया। गले से खून निकलते देख स्थानीय लोगों ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज जारी है।
पूर्व में जिले में एक शिक्षक की मांझे की वजह से मौत हो चुकी है ऐसे मे में यह घटना इस बात का संकेत है कि जिले में प्रतिबंधित मांझे के उपयोग से होने वाली दुर्घटनाओं में तेजी आई है। पिछले डेढ़ महीने में पूर्वांचल में चिकित्सक सहित दो लोग इस मांझे के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि लगभग डेढ़ दर्जन लोग घायल हो चुके हैं।
प्रतिबंधित मांझा आमतौर पर पतंगबाजी में उपयोग किया जाता है, अब एक गंभीर खतरा बन चुका है। इसके कारण होने वाली दुर्घटनाओं ने समाज में चिंता का विषय बना दिया है। स्थानीय प्रशासन को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
इस घटना ने यह भी दर्शाया है कि लोगों को इस प्रकार के खतरनाक सामान के उपयोग के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है। वकील हरीश चंद्र मौर्या की स्थिति गंभीर है, और उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी की जा रही है।
स्थानीय लोगों ने इस घटना के बाद प्रशासन से मांग की है कि प्रतिबंधित मांझे के उपयोग पर सख्त कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, लोगों को इस खतरे के प्रति जागरूक करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी आवश्यकता है। इस प्रकार की घटनाएं न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि समाज में भी भय का माहौल पैदा करती हैं। |
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