ख़बर है कि रिपब्लिक भारत को एक और बड़ा झटका लगा है। सैयद सुहेल के जाने से चैनल के भीतर की व्यवस्थाओं को करारा जवाब मिला है। सुहैल ने चैनल को अलविदा कह दिया है।
इनपुट है कि सैयद सुहेल के साथ रात 9 बजे ‘ये भारत है कि बात’ की पूरी टीम ने इस्तीफा सौंप दिया है। लेकिन सवाल ये कि रिपब्लिक भारत में आखिर इतनी भागम-भाग क्यों है?
इस अफरातफरी की एक वजह इंक्रीमेंट ना होना तो है ही, लेकिन उससे बड़ी वजह कुछ समय पहले आए उप-कप्तान हैं, जिनकी राजनीति को कोई पचा नहीं पा रहा है। उनकी इसी सियासत की वजह से करीब 6-7 महीने पहले करीब 7 से 8 लोगों को हटाया गया, लेकिन उनमें कई ऐसे लोगों को भी हटा दिया गया जो चैनल की जरूरत थे।
इन सबके पीछे मंशा शायद अपने लोगों की एंट्री करवाने की थी, जो कामयाब हुई नहीं, हां उस घटना के बाद लोग खुद को इन्सोक्यूर फील करने लगे, वो भी उस संस्थान में जहां इस तरह की सियासत नहीं होती रही है। लोगों ने नोकरी ढूंढना शुरू कर दिया इस सोच के साथ कि कहीं अगला नंबर उनका ही ना हो। फिर जिसको जैसे मिलता गया, निकलते गए।

इंडिया टीवी से लेकर ज़ी और न्यूज़18 से एनडीटीवी। जिसको जहां मौका मिला जॉइन कर लिया। पिछले तीन महीने में आउटपुट से शैलेन्द्र गिरी, बैद्यनाथ झा, मयंक, रवि, अक्षत, वत्सल, ट्विंकल, एंकर सुमित चौधरी, श्वेता त्रिपाठी, पुनीता सिंह, मीनाक्षी, प्रगति और रितु।
इनपुट से हिमांशु, पीसीआर से डायरेक्टर अनिल, अंकित, साउंड से अशोक, के बाद अब सुहेल के साथ रात 9 बजे की पूरी टीम का इस्तीफा सौंपा जाना दर्शाता है कि इस्तीफ़ों का ये सिलसिला अभी जारी है।
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