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‘ध्वजारोहण’ या ‘झंडा फहराना’: गणतंत्र दिवस पर आखिर क्या होता है? आसान शब्दों में समझें अंतर

LHC0088 2026-1-23 08:26:41 views 1251
  

क्या है ध्वजारोहण और झंडा फहराने में अंतर? (Picture Courtesy: Freepik)



लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को हम बड़े गर्व से तिरंगा फहराते हैं। आम बोलचाल में हम इन दोनों ही अवसरों को \“झंडा फहराना\“ कह देते हैं, लेकिन तकनीकी और संवैधानिक रूप से इन दोनों के बीच एक बड़ा अंतर है।  

15 अगस्त को \“ध्वजारोहण\“ किया जाता है, जबकि 26 जनवरी को \“झंडा फहराया’ जाता है। लेकिन इन दोनों में अंतर क्या है? आइए जानते हैं।  
झंडा फहराना (Flag Unfurling) - 26 जनवरी

26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस के दिन झंडा खंभे के ऊपर ही बंधा रहता है। इसे ऊपर ले जाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि केवल रस्सी खींचकर उसे खोल दिया जाता है और वह लहराने लगता है।

इसे अंग्रेजी में \“Unfurling\“ कहा जाता है। इसका मतलब है कि भारत पहले से ही एक स्वतंत्र राष्ट्र था और अब वह अपना संविधान लागू कर एक गणराज्य बन रहा है। गणतंत्र दिवस पर झंडा देश के राष्ट्रपति फहराते हैं। संवैधानिक रूप से राष्ट्रपति देश के पहले नागरिक और संवैधानिक प्रमुख होते हैं।

  

(Picture Courtesy: Freepik)
ध्वजारोहण (Flag Hoisting) - 15 अगस्त

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा झंडा खंभे के नीचे बंधा होता है। प्रधानमंत्री रस्सी खींचकर इसे नीचे से ऊपर ले जाते हैं और फिर खोलकर फहराते हैं।

इसे अंग्रेजी में \“Hoisting\“ कहा जाता है। नीचे से ऊपर ले जाकर झंडा फहराना इस बात का प्रतीक है कि भारत ने 200 वर्षों की गुलामी के बाद एक नए स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में जन्म लिया और अपना गौरव हासिल किया। स्वतंत्रता दिवस पर देश का नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं, क्योंकि उस समय तक भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और प्रधानमंत्री ही देश के राजनीतिक प्रमुख थे।
प्रमुख अंतर एक नजर में
विशेषता स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त)गणतंत्र दिवस (26 जनवरी)
प्रक्रिया झंडा नीचे से ऊपर ले जाया जाता है।झंडा ऊपर ही बंधा रहता है, केवल खोला जाता है।
शब्दध्वजारोहण (Flag Hoisting)झंडा फहराना (Flag Unfurling)
मुख्य अतिथिदेश के प्रधानमंत्री देश के राष्ट्रपति
स्थानलाल किला, दिल्लीकर्तव्य पथ (राजपथ), दिल्ली

स्थान का अंतर भी है समझें

एक और बड़ा अंतर समारोह के स्थान का है। 15 अगस्त का कार्यक्रम ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित होता है, जहां से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं। वहीं, 26 जनवरी का मुख्य समारोह कर्तव्य पथ पर होता है, जहां देश अपनी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकियों का प्रदर्शन करता है।
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